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ग्राउंड रिपोर्ट : यमुना में बहते अधजले शवों को नोंचते दिखे कुत्ते, संक्रमण का खतरा बढ़ा

Thu, 13 May 2021 03:11 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया

सार

घाट किनारे पड़े शवों को कुत्ते नोंच रहे हैं। शवों को ठीक से जलाने व दफनाने की व्यवस्था न होने से लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका है।
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यमुना में बहते अधजले शवों को नोंचते दिखे कुत्ते - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण और बुखार से रोजाना दम तोड़ रहे हैं। लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए अंतिम संस्कार पूरा होने से पहले ही अधजली लाश छोड़कर चले जाते हैं। वहीं, घाटों पर शव बहाए भी जा रहे हैं। अधजले शव नदी में बहकर आ रहे हैं।

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घाट किनारे पड़े शवों को कुत्ते नोंच रहे हैं। औरैया जिले के शेरगढ़ घाट पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। शवों को ठीक से जलाने व दफनाने की व्यवस्था न होने से लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका है। बुधवार को यमुना नदी स्थित शेरगढ़ घाट पर एक नहीं कई चिताएं जलती दिखीं।

कुछ चिताओं की आग बुझ चुकी थी, लेकिन शव पूरी तरह नहीं जले थे। वहीं नदी किनारे से लेकर बीच धार तक दो शव पानी में उतराते दिखे। कुछ शवों के अंश दिखे। घाट पर मौजूद एक पुरोहित ने बताया कि परिजन जैसे तैसे व्यवस्था कर शव जलाकर चले गए। किसी कारण वश शव पूरी तरह न जलने पर उन्हें घाट किनारे से नदी में प्रवाहित कर दिया जा रहा है। 
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शवों को नोंचते दिखे कुत्ते
शेरगढ़ घाट पर सुबह 11:30 बजे एक शव नदी के किनारे बहता नजर आया तो दूसरा शव बीच में दिखा। कुछ शवों को कुत्ते नोंच रहे थे। घाट पर दुर्गंध से बुरा हाल था। बीमारी से बचने के लिए लोग जल्दबाजी में शवों का अंतिम संस्कार करते नजर आए।

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15 से 20 शवों का रोज अंतिम संस्कार

औरैया सदर ब्लॉक के गांव चिरुहूली में 10 दिन में करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति बेहद गुस्सा है। ग्रामीणों के मुताबिक शैलू चतुर्वेदी, दीपू चतुर्वेदी, हलीम मास्टर, प्रहलाद, महाराज सिंह, तेज सिंह आदि की मौत हुई है। इन सभी को बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत थी। इसके अलावा शहर में भी दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। अंतिम संस्कार ज्यादातर शेरगढ़ घाट पर ही किए जा रहे हैं। रोजाना करीब 15 से 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

पंचायत चुनाव के बाद बिगड़ी स्थिति
पंचायत चुनाव के बाद लगातार मौतों से गांव संभल नहीं पा रहे हैं। मंजर यह है कि हर रोज चिताएं चल रहीं हैं। अधिकतर गांवों में लोग बीमार हैं। हालत गंभीर होने पर कुछ लोग शहर की तरफ दौड़ते हैं और कुछ लोग गांव में ही दम तोड़ देते हैं। न संदिग्ध लोगों को क्वारंटीन कराया जा रहा है न ही शेल्टर होम बनाए गए हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच भी नहीं की जा रही है। एक माह में जिले भर में 50 ऐसे लोगों की मौत हो चुकी है  जिनमें कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण थे।

कोरोना संक्रमित लोगों का प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। यदि घाट पर शवों को बिना जलाए ही प्रवाहित किया जा रहा है तो उसके लिए ग्राम स्तर पर गठित निगरानी समिति को सक्रिय किया जाएगा। साथ ही निगरानी रखने के लिए वहां किसी की तैनाती की जाएगी- सुनील कुमार वर्मा, डीएम औरैया

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