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औरैया पंचायत चुनाव: अध्यक्ष पद के लिए रस्साकसी शुरू, सपा का बहुमत का दावा, भाजपा जोड़तोड़ में जुटी

Fri, 07 May 2021 10:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया

सार

भाजपा बागियों और निर्दलीय जीतकर आने वालों के साथ अध्यक्ष के लिए जोड़तोड़ करने में जुटी है। वहीं सपा ने 10 सीटें जीतने के बाद पूर्ण बहुमत में होने की बात कहकर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निर्भर कर दिया है।
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राजवीर यादव, विनय शाक्य और श्रीराम मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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औरैया में जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर भाजपा की राह आसान नहीं लग रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जिले में सदस्यों की कुल 23 सीटों में पांच भाजपा के हिस्से में रही हैं। भाजपा बागियों और निर्दलीय जीतकर आने वालों के साथ अध्यक्ष के लिए जोड़तोड़ करने में जुटी है।
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वहीं सपा ने 10 सीटें जीतने के बाद पूर्ण बहुमत में होने की बात कहकर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निर्भर कर दिया है। अब तक बसपा चुप्पी साधे हैं। बसपा के हिस्से चार सीटें हैं। जबकि कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला है।

जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र औरैया सदर, बिधूना और दिबियापुर में वर्ष 2017 में भाजपा का वर्चस्व दिखा था। भाजपा ने इन तीनों सीटों पर काफी अंतर से जीत हासिल की थी। जबकि सपा का गढ़ होने के बाद भी सपा दूसरे नंबर रही। विधानसभा चुनाव में सफलता के बाद भाजपा ने वर्ष 2019 के लोकसभा में इसी तरह तैयारी की और इन तीनों विधान सभा क्षेत्रों से इटावा सांसद के लिए डॉ. रामशंकर कठेरिया को बहुमत मिल।
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इसके बाद से भाजपा मजबूत राजनीति में थी और पार्टी का जनाधार दिन पर दिन बढ़ रहा था। जिला पंचायत चुनाव में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के मैदान में उतारने के बाद बगावत के स्वर तेज हो गए। कई पार्टी कार्यकर्ता अपने ही पार्टी के लोगों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे, जिसका नतीजा यह रहा कि सपा ने बाजी मार दी।

हालांकि औरैया को सपा का गढ़ माना जाता है। अब सपा पूर्ण बहुमत का दावा करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए जुटी है। भाजपा भी पीछे नहीं है, करारी हार के बाद भी भाजपा अपना ही अध्यक्ष बनाने का दम भर रही है। 

नेता बोले
सपा के पास बहुमत के आंकड़े से अधिक सदस्य हैं। सभी सदस्यों की सहमति से अध्यक्ष पद के लिए चयनित उम्मीदवार का प्रस्ताव राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेज दिया गया है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी।- राजवीर यादव - सपा जिलाध्यक्ष 

बिधूना विधायक विनय शाक्य ने कहा कि पंचायत चुनाव में कम सीटों की कोरोना मुख्य वजह रही है। पार्टी जिस उम्मीद के साथ चुनाव लड़ी थी, वह परिणाम नहीं मिले हैं। कई नेता और कार्यकर्ता संक्रमित भी रहे हैं। लेकिन आने वाले दिनों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। 

भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है। पंचायत चुनाव में विरोधी दलों द्वारा अधिक पैसे खर्च कर मतदाताओं को गुमराह किया गया है। पार्टी ने विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के बलबूते पर चुनाव लड़ा था। जीते प्रत्याशियों की मांग और मिल रहे समर्थन को लेकर पार्टी पूरे दमखम से जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को लेकर गंभीर है। 

जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र
सदर विधान सभा क्षेत्र       स्व. रमेश चंद्र दिवाकर (भाजपा)
दिबियापुर विधान सभा     लाखन सिंह राजपूत (भाजपा)
बिधूना विधान सभा         विनय शाक्य (भाजपा)
संसदीय क्षेत्र इटावा         डॉ. रामशंकर कठेरिया (भाजपा)

अछल्दा और भाग्यनगर में भाजपा को मिली करारी हार
भाजपा ने इस बार बड़ी तैयारी के साथ पार्टी का समर्थन देकर जिला पंचायत सदस्य पदों पर चुनाव लड़ा। विधानसभा क्षेत्र दिबियापुर में आने वाले अछल्दा व भाग्यनगर ब्लाक में इस बार भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। अछल्दा ब्लाक की तीनों सीटों पर भाजपा दूसरे स्थान पर रही। यहां पर भाजपा के बड़े पदाधिकारी चुनाव लड़े और हार गए।
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जबकि ब्लाक भाग्यनगर की चार सीटों में से दो सीटों पर ही भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने दूसरे स्थान पर जगह बना पाई। पार्टी पदाधिकारी प्रत्याशियों के चयन से पहले उनके प्रति क्षेत्र के मतदाताओं से इनपुट न लिया जाना बता रहे हैं। अब जब कि वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। ऐसे में जिला पंचायत के चुनाव में विधानसभा दिबियापुर में करारी शिकस्त से पार्टी पदाधिकारी परेशान हैं। 

विधान सभा चुनाव के लिए तय होना था दिग्गजों का भविष्य
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा, सपा, बसपा के साथ कांग्रेस ने पूरी ताकत लगा दी। पार्टी हाईकमान ने इस चुनाव से ही वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की राह दिखाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए सभी दल के नेता और दिग्गज अपनी साख बचाने में जुटे। भाजपा ने जिस तैयारी के साथ चुनाव लड़ा, उसमें वह फेल हो गई।

अब कई दिग्गज नेता जो विधान सभा चुनाव की तैयारी में जुटे थे, वह पार्टी में लगातार हो रही बगावत और गुटबाजी को लेकर एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे है। वहीं सपा का गढ़ कहे जाने वाले औरैया में सपाई काफी उत्साहित हैं, वह इसी चुनाव से विधान सभा चुनाव की रणनीति में जुट गए हैं। जिला पंचायत सदस्यों के बहुमत और लगातार बढ़ रहे जनाधार को लेकर सपा जिलाध्यक्ष ने विधान सभा चुनाव में भी परचम लहराने की बात कही है।
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