स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर गति देने वाला सीएमओ कार्यालय की सेवाएं विकलांगता के दौर से गुजर रहीं हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए आपातकाल के समय डूबते को तिनके का सहारा साबित सीएमओ कार्यालय की एंबुलेंस जिला अस्पताल परिसर में गुमनामी के दौर से गुजर रही हैं।
सीएमओ कार्यालय में गैस अथारिटी इंडिया लिमिटेड (गेल) पाता, यूनीसेफ की ओर से प्रदान की गई एंबुलेंस कबाड़ हो रही है।
जिला अस्पताल परिसर में सीएमओ कार्यालय से संबद्ध छह तथा जिला अस्पताल से जुड़ी एक रोगी वाहन प्रचलन से बाहर होकर निष्प्रयोज्य की श्रेणी में पहुंच गए हैं। इनमें से दो एक रोगी वाहन दुर्घटना ग्रस्त है। शेष रोगी वाहन लंबे समय से प्रयोग में न लाए जाने से कबाड़ की श्रेणी में पहुंच गए हैं।
कबाड़ हुए रोगी वाहनों की ओर अब सीएमओ कार्यालय निगाह भी नहीं फेर रहा है और न ही सीएमओ कार्यालय में कबाड़ रोगी वाहनों को संचालन योग्य बनाए जाने की ठोस योजना भी नहीं है। ऐसी सूरत में ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व नवीन स्वास्थ्य केंद्रो से संबद्ध रोगियों को सरकारी एंबुलेंस की सेवा प्रदत्त नहीं हो पा रही।