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मदद के एवज में पालिका ने रखी शर्त

Fri, 22 Apr 2016 11:46 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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टंकी से पानी आपूर्ति नहीं
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पेयजल पुनर्गठन योजना को लेकर पालिका प्रशासन के लचर रवैये से गर्मी में पेयजल आपूर्ति की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। पालिका ने कार्यदाई संस्था जल निगम को सहयोग धनराशि जारी करने के एवज में पालिका की लाइनें जोड़ने की शर्त रख दी है। पालिका की यह शर्त जल निगम को रास नहीं आ रही है। ऐसे में अब जल निगम दूसरी किस्त के इंतजार करने को मजबूर है।
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दूसरी किस्त के अभाव में पेयजल पुनर्गठन योजना फंसी है। पालिका प्रशासन ने दूसरी किस्त से एवज में जो पुरानी पाइप लाइन से आपूर्ति की शर्त लगा दी है। यह शर्त सुन जल निगम के अधिकारी सकते में आ गए हैं। क्योंकि योजना के नियमों के मुताबिक 110 एमएम से कम की पाइप लाइन को योजना के तहत बनाए गए ट्यूबवेलों से नहीं जोड़ा जा सकता। ऐसे में यदि जल निगम के अधिकारी पालिका की बात से सहमत होते हैं तो नियमों का उल्लंघन उनके आड़े आ रहा है।

यदि जल निगम ने पालिका की बात ठुकरा दी तो शहर की पेयजल गड़बड़ाने पर पालिका के सामने गंभीर समस्या खड़ी होने का अंदेशा है। जल निगम का कहना है कि पालिका प्रशासन को सहयोग के तौर पर 30 लाख रुपये की दूसरी किस्त देनी है, लेकिन किस्त नहीं मिल पा रही है।
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नगर पालिका धनराशि देने को तैयार है बशर्ते जल निगम पहले इस बात पर राजी हो कि वह उक्त धनराशि से संचालित करने वाले छह ट्यूबवेलों से पालिका की पुरानी लाइनों को जोड़कर जलापूर्ति शुरू करा देगा। क्योंकि यदि शहर की जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिला तो फिर सहयोग देने के बाद भी पालिका के सामने समस्या जस की तस ही रहेगी।
राधा तिवारी, ईओ, नगर पालिका

पालिका ने योजना पर काम शुरू होने से पहले नाजायज शर्त रख दी है। पहले उस व्यवस्था को विकसित करने की बात की जानी चाहिए थी, जिससे जनता का हित जुड़ा है। दूसरी किस्त आने से पहले यदि पालिका से सहयोग मिल जाता तो दो काम पूरे हो जाते एक तो छह ट्यूबवेल चालू हो जाते, दूसरा उन ट्यूबवेलों से संबंधित पाइप लाइनें भी चेक हो जाती।
देवेंद्र सिंह, एक्सईएन, जल निगम

42 करोड की लागत से तैयार है परियोजना
शहर में लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत से संचालित पेयजल पुनर्गठन योजना में कार्यदाई संस्था जल निगम को प्रथम किस्त के रूप में पालिका के माध्यम से डेढ़ साल पहले 20 करोड़ रुपये मिले थे। इस धनराशि से जल निगम ने योजना के इस्टीमेट और नक्शे के मुताबिक मार्च 2015 तक छह पानी की टंकियां और 17 ट्यूबवेलों का एक साथ निर्माण कार्य शुरू करा दिया। इससे उक्त प्रथम किस्त की धनराशि समाप्त होने पर सभी काम अधूरा ही रहा।

इस पर तत्कालीन एक्सईएन ने शासन को खर्च हुई किस्त का उपभोग प्रमाण पत्र भेजकर दूसरी किस्त की मांग कर दी। कुछ कागजी कार्रवाई पूरी न होने से दूसरी किस्त मिलने में मामला फंसा रहा। लगभग छह माह बाद जानकारी मिलने पर वर्तमान एक्सईएन ने कागजी कार्रवाई पूरी कर बजट जारी करने की मांग की। लेकिन आज तक कार्यदाई संस्था जल निगम को योजना की दूसरी किस्त जारी नहीं हुई। इससे दिसंबर 2015 से ही काम अधूरे पड़े हैं। इधर मार्च 2016 में भूगर्भ जल स्तर के नीचे गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। जिससे पालिका के ज्यादातर ट्यूबवेल पानी छोड़ गए। हालांकि बाद में पाइप डलवाकर उन्हें संचालित कराया गया। इस घटनाक्रम के चलते पूरे शहर की पेयजलापूर्ति लड़खड़ा गई।
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