गुरु नारायण त्रिपाठी की फाइल फोटो। स्रोत: अरुण त्रिपाठी
औरैया। देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे में उस गुमनाम सेनानी का भी जिक्र होना जरूरी है जिन्होंने आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। औरैया के इतिहास में सोमदेव शर्मा का नाम अक्सर गूंजता है। उन्होंने अपनी परवाह किए बिना आजादी की अलख जगाई। इतना ही नहीं अंग्रेजों को धूल चटाने और स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने के लिए उन्होंने खुद को मृत घोषित करवा दिया था।
इतिहास के जानकार व पूर्व सैनिक अविनाश अग्निहोत्री ने बताया कि बिहार के पटना निवासी सोमदेव शर्मा ने औरैया को अपनी कर्मस्थली बनाया। उन्होंने 1857 की आजादी की जंग में अंग्रेजों से लोहा लिया। सोमदेव शर्मा ने औरैया में देशभक्तों का एक समूह तैयार किया। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ बिगुल फूंका। इससे परेशान होकर अंग्रेजों ने सोमदेव को जिंदा या मृत पकड़ने पर बड़े इनाम की घोषणा की थी। सोमदेव को अंग्रेजी सेना के अफसरों ने देखा नहीं था। इसका फायदा उठाते हुए उनके समर्थकों ने अंग्रेजों को भ्रमित करने के लिए एक शव को सोमदेव शर्मा के रूप में पहचान दी। ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें मृत मानकर फाइल बंद कर दी। सोमदेव आजादी मिलने तक ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अभियान चलाते रहे।
आजादी के बाद किया विवाह
सोमदेव ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक देश आजाद नहीं होगा वह शादी नहीं करेंगे। देश की आजादी के बाद वह पटना लौटे और विवाह किया। शादी के बाद उनके जितने भी बच्चे हुए वह सभी अपंग थे। इसके बाद वह अपनी कर्मस्थली कंचौसी वापस लौटे। कई लोगों के प्रयास से उनको झींझक कस्बे के एक स्कूल में पुस्तक बाइडिंग का काम मिला। जहां बाद में उनका देहांत हो गया।
नौकरी छोड़ आंदोलन में कूदे थे गुरु नारायण
आजादी के आंदोलन में एक ओर सेनानी बिधूना के देवरांव निवासी गुरु नारायण त्रिपाठी भी थे। सीमित संसाधन के कारण ये ज्यादा पढ़ लिख नहीं सके, लेकिन आजादी के आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया। गुरु नारायण त्रिपाठी के पुत्र अरुण त्रिपाठी बताते हैं कि पिता ने अपनी जीविका चलाने के लिए ग्वालियर के राज घराने में पुलिस की नौकरी की थी। 1857 के दौर में महात्मा गांधी ग्वालियर पहुंचे और आजादी आंदोलन को लेकर कई सभाएं की थी। जिनसे प्रेरित होकर गुरु नारायण नौकरी छोड़कर आंदोलन में कूद पड़े थे। परिवार के लोग आज भी अपने पूर्वज के किस्से सुनाते हैं।