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Auraiya News: जहां तक सड़क से देता है दिखाई, वहीं तक माइनरों की सफाई

Wed, 17 Dec 2025 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-15-कखावतू माइनर की सड़क किनारे की गई सफाई। संवाद
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औरैया। सिंचाई विभाग ने जिले में बड़े पैमाने पर माइनरों की सफाई कराई। इसके लिए टेंडर भी कराए गए और काम पूरा करने का दावा भी किया गया, लेकिन विभाग की मिलीभगत से सफाई के नाम पर इसमें खेल किया गया।
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माइनर सड़क से जहां तक नजर जाती है, सिर्फ वहीं तक उसकी सफाई कराई गई। हालात यह है कि उससे आगे न तो झाड़ियां हटाई गईं और न ही खोदाई की गई।
फसलों की सिंचाई के लिए जिले में आधा सैकड़ा से अधिक छोटी-बड़ी माइनर बनी हैं। इन माइनरों में हर साल सिल्ट जमा होने के साथ ही झाड़ियां उगने से रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। इसके लिए सिंचाई विभाग हर साल टेंडर कर इनकी सफाई कराता है। इस बार भी माइनरों की सफाई कराई गई, लेकिन जिम्मेदारों ने सफाई में खेल कर दिया। दरअसल, जहां भी माइनर सड़क से क्रॉस हुई हैं, वहां कुछ दूरी तक ही उनकी सफाई कराई गई है।
अधिकारी भी जब इसे देखने पहुंचते हैं तो वह सड़क पर खड़े होकर या चंद कदम चलकर ही देखकर लौट आते हैं। दरअसल, चंद कदमों के बाद माइनर की पटरी पर गाड़ी नहीं जा सकती है। वहीं, अधिकारी भी ऊबड़-खाबड़ पटरी पर जाने से बचते हैं। बस इसी का फायदा ठेकेदार और नहर विभाग के कर्मचारी उठा रहे हैं। हाल ये है कि सड़क से महज 300 मीटर बाद ही सफाई का नामो-निशान कहीं नजर नहीं आता। पटरी से लेकर माइनर के अंदर तक झाड़ियां नजर आ रही हैं। कखावतू और मिर्जापुर माइनर इस पूरे गड़बड़झाले की बानगी मात्र हैं। अधिकांश माइनरों का हाल कुछ ऐसा ही है।
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फर्जीवाड़ा छिपाने के लिए छुड़वा दिया पानी
माइनर सफाई में किया गया फर्जीवाड़ा छिपाने का भी जिम्मेदारों ने पूरा इंतजाम कर रखा था। इसी के चलते सड़क के आसपास माइनर की सफाई कराने के बाद पानी भी छोड़ दिया गया। इससे तली की सफाई पर पर्दा पड़ गया, लेकिन पटरी पर खड़ी घास और झाड़ियां होना इस फर्जीवाड़े की गवाही दे रहे हैं।

अधिकारियों को सत्यापन के लिए नहीं देते अभिलेख
जिला प्रशासन द्वारा भी माइनरों की सफाई का सत्यापन कराया जाता है, लेकिन, इसमें भी ठेकेदार ओर सिंचाई विभाग के अधिकारी खेल कर लेते हैं। दरअसल, जब प्रशासन से कोई अधिकारी जांच के लिए पहुंचता है तो उसे टेंडर या एस्टीमेट नहीं दिया जाता है। अधिकारियों को सत्यापन के लिए अभिलेख भी नहीं देते। ऐसे में अगर उसे किसी क्षेत्र में सफाई नहीं मिलती है तो ठेकेदार उस क्षेत्र का टेंडर न होने की बात कहकर बच जाता है।

केस एक :

300 मीटर तक चकाचक कर दी पटरी
मिर्जापुर माइनर की सफाई के लिए ठेकेदार को नहर विभाग ने टेंडर दिया था। यह टेंडर करीब दो लाख रुपये का था। दिबियापुर रोड की पटरी से दोनों तरफ करीब 300 मीटर तक ठेकेदार ने माइनर को चकाचक कर दिया, लेकिन इसके आगे कोई काम नहीं किया गया। अन्य सड़कों के किनारे भी ऐसे ही काम किया गया। अब माइनर में पानी भी छोड़ दिया गया है।

केस दो:

अंदर जाते ही सामने आ जाती है हकीकत
कखावतू माइनर की भी सफाई के लिए करीब दो लाख रुपये का टेंडर विभाग ने किया है। दिबियापुर रोड से केवल 300 मीटर तक माइनर की सफाई कराई गई है। दूर से देखने पर माइनर में सफाई कार्य नजर आता है, लेकिन पटरी पर अंदर जाते ही हकीकत सामने आ जाती है।

माइनरों की पूरी सफाई कराई गई है। सफाई कार्य का लगातार निरीक्षण भी किया गया है। अगर कहीं गड़बड़ी है तो उसे दिखवाया जाएगा। टेल तक पानी पहुंचाने के लिए पूरी माइनर की सफाई कराना अनिवार्य है।
-तारिक खान, अवर अभियंता सिंचाई विभाग

फोटो-15-कखावतू माइनर की सड़क किनारे की गई सफाई। संवाद

फोटो-15-कखावतू माइनर की सड़क किनारे की गई सफाई। संवाद

फोटो-15-कखावतू माइनर की सड़क किनारे की गई सफाई। संवाद

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