फफूंद को फिर से तहसील बनाए जाने का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। तहसील बनाए जाने की मांग को लेकर कस्बावासी भीषण ठंड में सुलग रहे थे। लोगों ने कस्बे की पुरानी अमानत वापसी की मांग के लिए नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज बुलंद की।
इसी मांग को लेकर रविवार को पूर्व सभासद विजय सिंह यादव, बलराम सिंह यादव, सुरेश चंद्र गुप्ता, सौरभ यादव, सभासद राजीव दिवाकर, सपा नगर अध्यक्ष मु. सत्तार कुरैशी, पन्नालाल, शाकिर, सलीम कुरैशी आदि कस्बाई लोगों ने चेतावनी दी कि अपनी विरासत वापस लेने को कस्बावासी किसी भी हद तक जा सकते हैं।
40 वर्षों से क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से संघर्ष कर रहे कसबावासियों ने यह भी बताया कि अजीतमल तहसील सृजन के साथ ही प्रशासन की ओर से फफूंद को तहसील बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा था, जो शासन में आज भी विचाराधीन है।
फफूंद ऐतिहासिक व प्राचीन कसबा है, लेेकिन प्रतिकूल स्थितियों के चलते विकास से दूर है। कसबे में अंग्रेजी शासनकाल में मुंसिफी और तहसील थीं। वर्ष 1896 में तहसील और 1930 में मुंसिफी समाप्त कर दी गई। तब से यह नगर बदहाली की ओर बढ़ता चला गया। फफूंद को पुन: तहसील बनाए जाने का मुद्दा गरमाने लगा है।