नए शिक्षा सत्र की शुरूआत हुए एक माह बीतने वाला है, लेकिन जिले में शिक्षा स्तर में कोई सुधार नहीं है। कहीं पर बच्चे ब्लैक बोर्ड साफ करते नजर आए तो कहीं पर गुरुजी आराम फरमाते। टीचरों ने दबी जुबान से बताया कि शिक्षा सत्र में बदलाव होने से यह परेशानी हो रही है। बिना किताबों के बच्चों को पढ़ता देख सभी हैरान है।
भीखमपुर मोहल्ला स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय का नजारा देखने लायक था। यहां गुरुजी अपना कागजी कोरम पूरा कर रहे थे और एक बच्चा ब्लैक बोर्ड साफ कर रहा था। जैसे ही गुरुजी ने कैमरे का फ्लैश चमकते देखा तो आननफानन बच्चे को डांटकर पढ़ाई को बैठा दिया।
बच्चों से किताबों के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि एक किताब से चार-चार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि इस विद्यालय में 60 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है, यहां मात्र 10 बच्चे ही नजर आए।
कांशीराम कालोनी स्थित प्राथमिक विद्यालय बघाकटरा में आठ-नौ बच्चे आपस में मस्ती कर रहे थे, जबकि गुरुजी अपना स्कूल काम निपटा रहे थे। बाद में टीचर ने बच्चों को पढ़ाई करने की हिदायत दी। यहां पर 62 बच्चे पंजीकृत थे, जिनमें से केवल 10 बच्चे ही आए हुए थे।
औरैया। प्राथमिक विद्यालय नवीन नरायनपुर में बच्चों की संख्या काफी कम थी। पूछने पर गुरुजी ने बताया कि शिक्षा सत्र में बदलाव होने से बच्चों को घर-घर जाकर लाना पड़ता है। अधिक बच्चे न होने के कारण बच्चे स्कूल परिसर में खेल रहे थे और टीचर अपना काम कर रहे थे।
जनपद के सभी प्राथमिक एवं जूनियर विद्यालयों में शासन के निर्देश पर पुरानी किताबें पहुंचा दी गई हैं। अगर कहीं पर किताबें नहीं पहुंची हैं तो जल्द ही उन विद्यालयों में किताबें पहुंचा दी जाएगी। राजेश कुमार श्रीवास बेसिक शिक्षा अधिकारी