जिला जज ने बाल श्रम को समाज की भीषणतम बुराइयों में से एक बताया। कहा कि यह किसी भी देश के लिए एक अभिशाप से कम नहीं है।
शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर जिला जजी में आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए जिला जज धर्म विजय सिंह ने कहा कि बाल श्रम किसी भी देश की उन्नति में सबसे बड़ा बाधक है।
बाल्यावस्था की उम्र में बच्चे के हाथ में पढ़ाई के लिए कापी और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में वह भरण-पोषण का काम करने को मजबूर है। कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्राधिकरण के नोडल अधिकारी एडीजे अंगद सिंह ने कहा कि विश्व के करोड़ों लड़के व लड़कियां भुखमरी और गरीबी के चलते बाल्यावस्था में मजदूरी करने को विवश हैं। निशुल्क शिक्षा के प्रति जलाई जा रही मशाल का लोग जागरूकता की कमी के चलते लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
प्राधिकरण सचिव सिविल जज सीनियर डिवीजन हरवंश नारायण त्रिपाठी ने कहा कि 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाकर लोगों को बाल श्रम के विरुद्ध जाग्रत किया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को बाल मजदूरी से बचाना है। संगोष्ठी का संचालन अधिवक्ता महावीर शर्मा ने किया।
इस मौके पर सीजेएम सत्य प्रकाश द्विवेदी, डीबीए अध्यक्ष अशोक अवस्थी, पूर्व अध्यक्ष सुनील दुबे, आनंद दुबे, डीजीसी अरूण चतुर्वेदी, पंकज शर्मा, पंकज मिश्रा के अलावा शिव कुमार सिंह कोर्ट मैनेजर विपिन कुमार सिन्हा, जेपी नारायण आदि ने विचार व्यक्त किए।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण योजना वर्ष 2015-16 के अंतर्गत शुक्रवार को तहसील अजीतमल के सभागार में बाल श्रम दिवस गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता तहसीलदार देवेंद्र कुमार ने की।
तहसीलदार ने बताया कि बाल श्रम बड़ा अपराध है। किसी भी सार्वजनिक स्थल पर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे से काम कराना बाल श्रम में आता है। बाल श्रम कराने पर कठोर दंड मिलता है।
वहीं नायब तहसीलदार संध्या शर्मा ने कहा बाल श्रम को पूरी तरह रोका जाएगा । गोष्ठी में रामचंद्र, धर्मवीर यादव, रामनारायण वर्मा, शिवसागर, क्षमानंद आदि उपस्थित रहे।