औरैया। बरसात व ओलावृष्टि से मौसम में बदलाव से अरहर, सरसों और गेहूं की फसलों में बीमारी लगने की आशंका गहरा गई है। सरसों में इस समय सफेद रतुआ के लक्षण दिखाई दे रहे है। तेज हवाओं से गेहूं की फसल गिरने व नमी के कारण रोग लगने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, जिला कृषि अधिकारी फसलों में बीमारी न लगने की बात कह रहे हैं।
जिले में अबकी एक लाख दो हजार 704 हेक्टेयर में गेहूं और 15516 हेक्टेयर में सरसों की फसल की बुवाई हुई है। सप्ताह भर पहले हुई ओलावृष्टि से सरसों व चना की फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा है। सरसों की फसलों को सफेद रतुआ बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है।
सरसों की फसल में सफेद रतुआ के संक्रमण की पहचान पत्तियों पर सफेद रंग के धब्बे से की जा सकती है। रोग की अधिकता की वजह से पौधे का ऊपरी हिस्सा मुड़ जाता है और फूल वाली टहनियां भी टेढ़ीमेढ़ी हो जाती है। इनमें फलियां भी नहीं बनती। तेज हवाओं से खेतों में गेहूं की फसल धराशायी हो चुकी है।
किसान मौसम की मार से पैदावार कम होने के साथ गेहूं में जिंक की कमी होने का अंदेशा जता रहे हैं। मौसम से फसलों के प्रभावित होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी नष्ट फसलों का आंकलन करने में जुट गए हैं। आंकलन करने पहुंच रहे कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा फसलों को बीमारियों से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं।
बमुरीपुर गांव के किसान कैलाश नारायन ने बताया कि उसकी सरसों की फसल को सफेद रतुआ लगा है। बचाव के लिए दवा का छिड़काव किया है। उधर, कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम परिवर्तन से चना, अरहर, सरसों और गेहूं की फसल पर असर पड़ा है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
गेहूं की फसल में जिंक की कमी से हल्के भूरे रंग के पत्ते हो जाते हैं। बचाव के लिए एक किलो जिंक सल्फेट दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। सरसों की फसल में सफेद रतुआ से बचाव के लिए डाईथेन एम 45 या इंडोफिल एम 45 की 600 ग्राम मात्रा दो सौ लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ में छिड़काव किया जा सकता है।
किसानों की नष्ट हुई फसलों का आंकलन किया जा रहा है। फसलों को बीमारियों से बचाव के लिए किसानों को कृषि रक्षा इकाई केंद्र पर सुझाव भी दिए जा रहे हैं। यदि किसी किसान को फसल में बीमारी की आशंका है तो वह फसल का सैंपल लेकर कृषि इकाई केंद्र पर आकर सुझाव ले सकता है।
आवेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी