औरैया। पिछले दिनों पदोन्नति पाते हुए जिले में तैनात रहे बीएसए अनिल कुमार प्रयागराज चले गए। जाते-जाते वह दो शिक्षकों के खिलाफ डिस्मिसल समेत सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर गए। दोनों शिक्षक अमान्य शिक्षक संगठन यूटा के रहे। 29 जून को किए गए आदेश की भनक हालांकि किसी को नहीं लगी।
बीएसए अनिल कुमार की ओर से 29 जून के आदेश में सेवा समाप्ति व डिस्मिसल के लिए पहला नाम प्राथमिक विद्यालय दलीपपुर में तैनात रहे सहायक अध्यापक देवेंद्र प्रताप सिंह का रहा। आदेश पत्र में उन्हें अमान्य शिक्षक संगठन यूटा का बताया गया। शिक्षकों से धन उगाही से लेकर तमाम आरोप इसमें शामिल रहे। साथ ही शिक्षक के विपरीत आचरण होने का जिक्र किया गया। गिरोह बनाकर शिक्षण कार्य के विपरीत काम करने का जिक्र किया गया है।
देवेंद्र प्रताप पर साल 2017 में तत्कालीन बीईओ बिधूना मनोज कुमार लाक्षाकार से मारपीट, साल 2022 में तत्कालीन बीईओ बिधूना अवनीश कुमार से मारपीट मामले का जिक्र किया गया है। इसमें मुकदमा भी दर्ज है। कन्नौज के बीएसए कार्यालय के लिपिक विमल पांडेय को एंटी करप्शन टीम के द्वारा पकड़वाने में गैर जनपद बिना किसी सूचना के जाने व कार्यालय में सीसी टीवी कैमरे उखाड़ने समेत अमर्यादित आचरण का जिक्र किया गया है।
मामले को लेकर कर्मचारी नियमावली के तहत जांच, निलंबन व पक्ष रखने समेत तमाम पहलुओं का जिक्र किया गया। आदेश पत्र में भी यह भी जिक्र किया गया कि अखबार में सार्वजनिक सूचना के बाद भी शिक्षक देवेंद्र प्रताप पांच बिंदुओं पर अपना पक्ष देने नहीं पहुंचे। जिसके बाद बीएसए ने शिक्षा परिषद कर्मचारी वर्ग नियमावली-1973 व अन्य नियमावली के तहत पांचों आरोपों की पुष्टि पाते हुए डिस्मिसल व सेवा समाप्ति का आदेश कर दिया।
वहीं दूसरे शिक्षक के तौर पर पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिखरना कंपोजिट में तैनात रहे सहायक अध्यापक ओमजी पोरवाल का नाम रहा। जिन्हें अमान्य संगठन यूटा के जिलाध्यक्ष के रूप में शिक्षक आचरण के विपरीत होने समेत वेतन, एरियर व अनुपस्थिति को लेकर शिक्षकों से धन उगाही के आरोपों के दायरे में रखा गया। तत्कालीन बिधूना बीईओ मनोज कुमार लाक्षाकार व अवनीश यादव के साथ मारपीट करने समेत पांच बिंदुओं में दोषी पाया।
आपराधिक प्रवृत्ति व दर्ज मुकदमों का हवाला दिया गया। वहीं निष्कर्ष में यह भी जिक्र किया गया कि तत्कालीन बीएसए विपिन कुमार के कार्यालय में घुसकर मारपीट व अभिलेख फाड़ने के आरोप में भी दोषी पाया गया। इन आरोपों के बाद हुए निलंबन के बाद जांच कमेटी ने भी रिपोर्ट दी। जिसके बाद शिक्षक ओमजी पोरवाल से पक्ष जानने के लिए अखबार के जरिए सार्वजनिक सूचन भी दी गई। शिक्षक के द्वारा पांच बिंदुओं पर अपना पक्ष ही नहीं दिया गया। जिसके बाद आरोपों की पुष्टि हुई। शिक्षक ओमजी पोरवाल पर भी डिस्मिसल व सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर दी।
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सेवा समाप्ति तो ठीक डिस्मिसल की कार्रवाई जिले के लिए रही बड़ी
दोनों शिक्षकों पर सेवा समाप्ति के साथ हुई डिस्मिसल की कार्रवाई अपने आप में चौकाने वाली है। तत्कालीन बीएसए अनिल कुमार ने अपने कलम से दोनों शिक्षकों पर शिकंजा मजबूत कसा है। जानकार बताते हैं कि यह जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के इतिहास में पहली बार हुआ है। डिस्मिसल के बाद दोनों शिक्षक अपने शैक्षिक कागजात से दूसरी जगह नौकरी भी नहीं कर पाएंगें।
बोले जिम्मेदार-
‘नियमावली के तहत शिक्षक ओमजी पोरवाल व देवेंद्र प्रताप सिंह का डिस्मिसल व सेवा समाप्ति की गई है। दोनों को पांच बिंदुओं पर दोषी पाया गया है। इसके लिए निर्धारित प्रकि्रया का पालन किया गया है। 29 जून को ही दोनों शिक्षकों के खिलाफ यह कार्रवाई कर दी गई थी।’- अनिल कुमार, निवर्तमान बीएसए
‘जाते-जाते बीएसए कुछ शिक्षकों पर कार्रवाई कर गए हैं। क्या कर गए हैं, यह अभी पता नहीं चला है। पत्रावलियां देखनी पड़ेंगी। नए बीएसए चार्ज लेने के बाद एक सप्ताह की छुट्टी पर गए हैं। जिनके आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।’- दाताराम, कार्यकारी प्रभारी बीएसए