अपनी पत्नी के साथ पीड़ा बयां करता सरमन।
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पछैंया बस्ती के लोगोें ने शराब का धंधा छोड़ दिया तो कई परिवारों को अब दो जून की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। बस्ती के लोग अब प्रशासन से फौरी तौर पर मदद की मांग कर रहे हैं। जिससे उनके घर के चूल्हे जल सकें। प्रशासन ने राशनकार्ड के लिए लोगों के नाम दर्ज तो कर लिए लेकिन उनके लिए खाद्यान्न की अब तक व्यवस्था नहीं कराई। इससे बस्ती के लोगों में आक्रोश पनप रहा है।
पछैंया बस्ती में पिछले चार दिन अवैध शराब निर्माण पूरी तरह से बंद है। महिलाओं और युवाओं ने पियक्कड़ों को भी भगा दिया। बस्ती में कई परिवार ऐसे हैं जिनके चूल्हे शराब बिकने पर ही जलते थे। अब स्थिति यह है कि कई घरों में दो जून के रोटी के भी लाले पड़ गए हैं। प्रशासन ने उन्हें बेहतर जिंदगी के सपने तो दिखाए मगर फौरी तौर पर कोई सहायता नही दी। बस्ती निवासी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि कई घरों के बच्चे तो कई दिनों से भूखे पेट ही सो रहे हैं। आस पड़ोस के लोग कुछ खाने को दे देते हैं। इसके अलावा उनके पास जीविका का कोई साधन नहीं है।
सरमन ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। सालों से वह भी शराब के कारोबार में था। आज जब इस कारोबार से तौबा कर ली है तो उनके पास पेट की आग बुझाने को एक तिनका भी नहीं है। ऐसे में अब वह क्या खुद खाएं और क्या बच्चों को खिलाएं। यहां तक की उनके पास रहने के लिए भी कोई पक्का आवास नहीं है। बरसात के बीच पालिथीन के सहारे झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि हमने तो शराब निर्माण को बंद करने का फैसला कर लिया है। अब जिला प्रशासन उनकी रोजी रोटी की भी व्यवस्था करे। बनारसीदास वार्ड की सभासद कमला देवी ने जिला प्रशासन से गरीबी की हालत मेें रह रहे पछैंया बस्ती के लोगों की समस्याओं को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
पछैंया बस्ती के गरीब परिवारों के लिए तुरंत खाद्यान्न की व्यवस्था की जा रही है। किसी भी तरह से उनकी जीविका का संकट नही होने दिया जाएगा। जल्द ही फाइल बनवाकर सबको नया काम भी दिलाया जाएगा।
माला श्रीवास्तव, डीएम
डीएम के निर्देश पर तुरंत बस्ती में टीम भेजकर लोगों के फार्म भरवाकर पूर्ति विभाग से खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराई जा रही है। किसी को दिक्कत नही होने दी जाएगी।
राजेंद्र कुमार, एसडीएम