औरैया। पिता-पुत्रों के रिश्तों में आई खटास के चलते दो बेटों ने फुफेरे भाई के साथ मिलकर पिता की हत्या कर डाली। पुलिस ने रविवार को पिता को बिना नंबर वाली कार में अगवाकर उन्हें मारपीट कर मारने वाले दोनों बेटों और उनके फुफेरे भाई को गिरफ्तार कर लिया है।
एसपी अभिजित आर शंकर ने बताया कि आरोपियों में मृतक रविंद्र के बेटे आदेश, नवीन व भांजे अंकित को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा गया है। घटना का खुलासा करने वाली टीम को 25 रुपये का पुरस्कार दिया गया है।
इटावा के सिविल लाइन थाने के गांव नगला महाजीत निवासी रविंद्र (50) बीस साल से अपने मामा स्व. मिलाप सिंह के यहां कुदरकोट थाने के रठा गांव में रहते थे। रविवार सुबह रविंद्र गांव निवासी अपने भतीजे विवेक के साथ भरथना जाने के लिए बाइक से निकले थे।
इसी दौरान वैवाह बंबे के पास कार सवार चार लोग उनकी बाइक में टक्कर मारने के बाद रविंद्र को अगवा कर ले गए। सुबह 11 बजे के करीब मिली सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस ने कार सवारों की तलाश शुरू की।
वहीं भतीजे विवेक व उसकी बहन रूबी के शक जाहिर करने पर पुलिस ने रविंद्र के ही बेटों का मोबाइल नंबर ट्रेस किया। शाम छह बजे के करीब स्वाट टीम प्रभारी प्रशांत कुमार व थानाध्यक्ष कुदरकोट नीरज शर्मा ने टीम के साथ घेराबंदी शुरू की। उन्होंने एरवाकटरा के जयसिंहपुर के पास से जा रही कार को पकड़ लिया। पुलिस ने कार से रविंद्र को घायल हालत में बरामद किया। साथ ही उसके बेटे आदेश, नवीन व भांजे अंकित निवासी बकुआ अछल्दा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने घायल रविंद्र को आरोपियों की कार से ममेरे भाई रामनरेश व पुलिस के साथ सीएचसी एरवाकटरा पहुंचाया। वहां डॉक्टर ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। इधर, गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ में आरोपी बेटों ने बताया कि पिता कहीं जमीन दूसरों को न दे दें, इसे लेकर उन्होंने अपनी बुआ के बेटे अंकित के साथ पिता की हत्या की योजना बना ली।
आदेश बोला-मैं चला रहा था कार, दोनों भाई पिता को पीट रहे थे
आदेश ने बताया कि उसने रठा के पास 14 बीघा जमीन बलकट पर ले रखी थी। रविवार को भूसा ढुलाई करने के दौरान उन्होंने पिता को जाते देखा तो घटना को अंजाम देने के लिए उन्हें अगवा कर लिया। बताया कि वह कार चला रहा था, जबकि अंकित व नवीन पिता को पीछे वाली सीट पर डाल कर मारपीट कर रहे थे।
शादी में मिले दहेज से खरीदी थी कार
रविंद्र की हत्या में प्रयोग की गई कार को पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद कर लिया। कार रविंद्र के बड़े बेटे आदेश के नाम पर पंजीकृत है। आदेश ने बताया कि उसकी 10 माह पहले शादी हुई थी। दहेज में उसे आठ लाख रुपये मिले थे। इसमें से तीन लाख रुपये जमा कर उसने कार खरीदी थी। वह ओला कंपनी में अपनी कार को टैक्सी के रूप में भी चलाता था।
शव इटावा ले गए परिजन
रविंद्र के परिवार में पत्नी उर्मिला, दो बेटे आदेश, नवीन व एक बेटी है। बेटों ने ही उसकी हत्या कर दी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद रिश्तेदारों ने रठा में अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद परिजन शव को पैतृक गांव ले गए। वहां मृतक के भाई रमेश ने उनका अंतिम संस्कार किया।
ट्रैक्टर चलाकर खरीदी थी जमीन, बेटे करते थे परेशान
रविंद्र की हत्या के बाद से रठा गांव में भी सन्नाटा पसरा रहा। रिश्तेदार गमगीन माहौल में घर में बैठे रहे। ममेरे भाई रामनरेश ने बताया रविंद्र 20 साल पहले ट्रैक्टर लेकर रठा आए थे। तभी से वह यहीं रह रहे थे। उन्होंने मेहनत कर 10 बीघा जमीन खरीदी थी जो आज बेशकीमती है। रविंद्र के बेटे उसे परेशान करते थे। घर ले जाकर मारपीट कर रुपये ले लेते थे।
हवालात में बेचैन रहे हत्यारोपियों बेटे
औरैया। पिता रविंद्र की हत्या के बाद पुलिस हिरासत में हत्यारोपी बेटे बेचैन रहे। वह मजबूरी में आकर हत्या करने का कदम उठाने की बात कहते रहे। आरोपी बेटे आदेश ने आरोप लगाया कि पिता रविंद्र के अवैध संबंधों के चलते वह बचपन से ही उनके प्यार के लिए तरसते रहे। होश संभालने के बाद मां उर्मिला की पीड़ा उनसे देखी नहीं जाती थी।
उन्होंने कई बार पिता को समझाने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने रिश्तेदार व संभ्रांत लोगों से पंचायतें भी करवाईं। सभी विफल रहीं। अब पिता जमीन दूसरों को दे रहे थे। इससे शादी के लिए घर पर बैठी छोटी बहन व उनके भविष्य पर भी संकट छाने लगा। इसी से उन्होंने यह कदम उठाया। यदि पिता अपने परिवार को तवज्जो देते तो उन्हें उनकी हत्या करने के लिए मजबूर न होना पड़ता। (संवाद)