संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में ब्लड बैंक के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर खामियों को दूर करते हुए मानकों को पूरा कर लिया गया है। एसी के बाद जेनरेटर का ऑटोमेशन कर दिया गया है।
जल्द ही ड्रग इंस्पेक्टर से लेकर लखनऊ व सेंट्रल स्वास्थ्य टीम भी सर्वे करेगी। इसे देखते हुए सीएमओ स्तर से संबंधित अधिकारियों से संपर्क शुरू कर दिया गया है। जिले में ब्लड बैंक के अभाव के चलते रक्त रोगियों से लेकर हादसों में घायलों को अक्सर रेफर किया जाता है। जिले में रक्तकोष का अभाव काफी हद तक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है। जिले में एक मात्र शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा को धरातल पर उतारने के लिए वर्षों से कवायद चल रही है।
इस कड़ी में ब्लड बैंक के लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर पिछले दो माह से खामियों को दुरुस्त किया जा रहा है। सीएमओ के निरीक्षण में एसी व ऑटोमेटिक जेनरेटर का अभाव पिछले दिनों ब्लड बैंक की खामी के तौर पर सामने आया था। इसके बाद सीएमओ ने जहां तीन एसी मुहैया कराई, वहीं जिला अस्पताल स्तर से जेनरेटर का ऑटोमेशन कराया गया है। ऑटोमेटिक जेनरेटर के लिहाज से ब्लड बैंक की वायरिंग भी कराई जा रही है। ऐसे में खामियां पूरी हो चुकी है।
अप्रैल माह के अंत तक ड्रग इंस्पेक्टर का निरीक्षण होते ही रिपोर्ट बनाकर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए भेजी जाएगी। इसके बाद लखनऊ व सेंट्रल की स्वास्थ्य टीम भी ब्लड बैंक को लेकर निरीक्षण करेगी। लगभग मई माह में यह कवायद पूरी हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद ही रक्त संबंधी मरीजों की समस्याओं को जिले में हल किया जा सकेगा। रेफर करने की व्यवस्था पर विराम लग पाएगा। खास तौर पर प्रसव मामलों को लेकर क्रिटिकल केस भी जिले में उपचारित हो पाएंगे।
वर्जन
ब्लड बैंक की सभी खामियों को दूर कर लिया गया है। जेनरेटर का आटोमेशन भी करा दिया गया है। ऑटोमेटिक जेनरेटर के लिहाज से ब्लड बैंक के परिसर में तारों की वायरिंग कराई जा रही है। जल्द ही सर्वे शुरू हो जाएंगे। मई-जून माह में ब्लड बैंक शुरू हो जाने की उम्मीद है।
-डॉ. सुनील कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी