आठ दिवसीय चैत्र नवरात्र महोत्सव शनिवार से शुरू हो रहा है। इस बार मां भवानी डोले पर विराजमान होकर आएंगी और गज पर सवार होकर जाएंगी। शहर के प्रमुख मंदिरों में देवी के दरबार सज गए हैं।
इस दौरान भक्ति और आस्था का ज्वार उमड़ेगा । कलश स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6.25 से 7.54 बजे तक रहेगा।
पंडित लक्ष्मीनारायन दुबे के अनुसार नवरात्र महोत्सव के दौरान श्रद्धालु देवी के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि और महागौरी और सिद्धधात्री रूपों की पूजा करें। बताया नवरात्र शनिवार को हिंदू नव संवत्सर में शुरू हो रहे हैं। इसे वासंतिक नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।
दुर्गा पूजा का शुभारंभ घट (कलश) स्थापना से करें। इस दिन सूर्योदय से प्रतिपदा तिथि और हस्त नक्षत्र होगा। नवरात्र में प्रत्येक दिन अखंड पाठ और दीप जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से घर-परिवार में खुश, शांति, संपदा और व्यापार में समृद्धि होगी। उन्होंने बताया 21 मार्च से चैत्र के नवरात्र शुरु होंगे।
इस बार तीज तिथि की हानि होने से नवरात्र आठ दिन के होंगे। 28 मार्च को रामनवमी के साथ नवरात्र महोत्सव का समापन होगा। इधर मंदिरों में भी सजावट को अंतिम रूप दे दिया गया है। शहर के काली माता मंदिर, फूलमती, गमा देवी, मंगलाकाली मंदिर समेत दर्जन भर देवी मंदिरों में घंटा घड़ियाल और मैया के जयकारे गूंजेगे।