कई लाख योगियों के बाद मानव योनि मिलती है। मानव योनि से मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा अमृत समान है। बिना कथा का श्रवण किए सांसारिक मोह माया से मानव को मुक्ति नहीं मिल सकती है।बिना मुक्ति से मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। यह बात भागवत ज्ञान यत्र में भागवताचार्य पंडित महेंद्र मिश्र ने कही।
भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने कहा कि भागवतकथा श्रवण के बिना मावन की मुक्ति का मार्ग संभव नहीं है। सात दिनों तक चली भागवतकथा में भक्तों को भक्ति और ज्ञान की गंगा से सराबोर किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी गाय का रूप है। जब धर्म पर अधर्म हावी हो जाता है, तो गाय रुपी पृथ्वी कराह हो उठती है।
श्रोता को शुद्ध आसन पर ध्यान लगाकर ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। भागवतकथा का ब्राह्मण आचार्य से ही श्रवण करना चाहिए। बिना भक्ति के मानव को संसार से मुक्ति नहीं मिल सकती है। बुधवार की दोपहर हवन पूजन के बाद कथा का समापन हो गया। समापन अवसर पर भक्तों ने आचार्य का आशीर्वाद लिया और विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। आयोजक एवं परीक्षित श्रीमती सुषमा देवी एवं श्याम स्वरूप मिश्रा, सुरेश मिश्र, देवेश, राजेश, विनय, अमित, प्रदीप, हरिओम, आशुतोष कृपाशंकर आदि ने सभी आगंतुकों का आभार जताया।