हॉटस्पॉट क्षेत्र कस्बा खानपुर और दयालपुर मोहल्ले में रोजेदार अब कोरोना से निपटने के लिए दुआ को हथियार बना रहे है।
घरों और मस्जिदों में की जा रही इबादतों में अब कोरोना से निपटने के लिए दुआओं का सहारा लिया जा रहा है। साथ ही रोजा इफ्तार में सोशल डिस्टेंस का भी ख्याल रखा जा रहा है।
जमालशाह स्थित बिलाल मस्जिद जमालशाह के इमाम हाफिज अल्तमस चिश्ती ने बताया कि कुरान करीम वह किताब है, जिसके पढ़ने और सुनने पर बहुत सवाब मिलता है।
मौलाना ने खुदा पाक का शुक्र अदा किया और बताया कि इस्लामिक सेंटर के फेसबुक पर रिले की गई कुरान करीम का एक दौर पूरा हुआ है। रमजान ने रोजे की नेकी के रास्ते पर चलना आसान करते हैं। इस महीने में जकात, खैरात, करना जरूरी है।
कारी नौशाद ने कहा कि रमजान में दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी इबादत है। अल्लाह के प्यारे रसूल सबसे अधिक सखावत करने वाले यानी दानी थे। साथ ही रोजे के दौरान इंसान उन चीजों से दूर रहे जिन चीजों से अल्लाह ने मना किया है।
जैसे झूठ बोलना, गालीगलौज करना, धोखा देना, अमानत में खयानत करना, हराम चीजों को देखना आदि शामिल है।
जियाउल हक ने बताया कि रमजान महीने में जो भी इंसान रोजा रखता है, उसका साल अल्लाह खुशियों से भर देता है। रमजान की इबादतों का असर पूरे साल इंसान की जिंदगी पर दिखता है।
किसी और माह किए गए अच्छे काम का बदला भले ही देर से मिले, लेकिन रमजान में नेकी का बदला अल्लाह फौरन देता है। दुआएं भी जल्द कबूल करता है।