ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रविवार को सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष का पूजन कर अपने पति की दीर्घायु की कामना की। सुबह से महिलाएं सज धजकर बरगद के वृक्ष के नीचे पहुंचीं। उन्हाेेंने विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की।
इस दौरान सुहाग की रक्षा को महिलाओं ने खरबूजे एवं पुआ पूड़ी आदि चढ़ाया तथा वट वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधते हुए मनौती मांगी। बताते हैं कि प्राचीन काल में सावित्री ने अपने पति सत्यवान की लंबी उम्र के लिए इस अमावस्या को पूजा की थी, जो कालांतर में वर अमावस्या कहलाई।
सुहागिन महिलाएं पूजा करने लगी। इधर, वट अमावस्या को लेकर महिलाओं में भ्रम की स्थित रही। बताया जाता है कि कुछ पंचागों में सोमवार को अमावस्या है।