बैंकों से नगदी निकालने की सीमा खत्म होने के बाद भी करेंसी की किल्लत कम होती नहीं दिख रही है। बैंकों की चेस्ट को आरबीआई से डिमांड के अनुसार करेंसी नहीं मिल रही है।
लोग बैंकों से नगदी तो तेजी से निकाल रहे हैं जबकि जमा निकासी का एक तिहाई ही हो रहा है। ऐसे में जिले के अधिकतर एटीएम भी करेंसी के संकट से जूझ रहे हैं।
नोटबंदी के समय बैंकों में जमा हुई नगदी लगातार निकल रही है। निकासी अचानक ही बढ़ी है। वहीं, बैंकें आरबीआई से ज्यादा करेंसी की डिमांड कर रही हैं मगर ये डिमांड पूरी नहीं हो रही है।
ऐसे में बैंकों के सामने समस्या खड़ी है कि जो करेंसी मिल रही है उसे एटीएम में डालें या फिर बैंक में आने वालें ग्राहकों को दें। ऐसी स्थिति में कई बैंकें एटीएम में कैश ही नहीं डाल रही हैं। कुछ बैंकों की हालत तो ऐसी है कि नगदी दो घंटे में ही खत्म हो रही है। बड़े लोगों के चल रहे चालू खाते से मोटी रकम निकाली जा रही है।
इससे एटीएम तक रकम नहीं पहुंच पा रही है। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक आदि में करेंसी हर दिन आती है। जिले में विभिन्न बैंकों की 109 शाखाएं हैं। नगदी का संकट सब में है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि नोटबंदी के दौरान लोगों में कैशलेस ट्रांजक्शन बढ़ा था। बैंकों में नोट मिलने तो लोग कैशलेस टांजक्शन कम करने लगे। इसी को बढ़ावा देने के लिए बैंकों में कम कैश पहुंच रहा है।