का करें साब भाजत-भाजत कमर दुखत हैं, पर कौनऊ नाहीं सुन रहो। प्रार्थना पत्र लैके एक साल ते अधिकारियन के चक्कर लगावत हैं, फिरउ पेंशन नाही मिल पाय रही है।
यह कोई जुमला या कहानी नहीं है बल्कि एक साल से वृद्धावस्था पेंशन के लिए भटक रहे 80 वर्षीय डेरा बंजारन के मौजा सेहुद निवासी विशंभर सिंह की दास्तां हैं। अमर उजाला प्रतिनिधि ने जब जिला मुख्यालय पर झुकी कमर और हाथों में कागज लिए एक बुजुर्ग को देखा तो बरवस पूछे बिना रहा नहीं गया।
पूछने पर विशंभर सिंह ने बताया कि शासन द्वारा 15 साल से उन्हें वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है, लेकिन पिछले एक साल से उनके खाते में पेंशन नहीं पहुंची है। अधिकारियों से संपर्क करने पर बताया कि जल्द ही पेंशन की रकम उनके खाते में पहुंच जाएगी, लेकिन अभी तक नहीं आई है।
ऐसे में पेंशन पाने के लिए एक साल से उम्र के इस पड़ाव में लडख़ड़ाते पैरों से अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को वृद्ध मजबूर हैं। पेंशनधारकों की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
शासन की अनदेखी के चलते वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों को एक वर्ष से पेंशन के दीदार नहीं हुए हैं। हालत यह है कि बुढ़ापे में अधिकारियों की चौखट तक दौड़ लगानी पड़ रही है। बावजूद इसके नतीजा शून्य है।
जिले में 40658 वृद्धावस्था पेंशन भोगी हैं। हाल ही में 37974 पेंशनरों के खातों में रकम पहुंच चुकी है। प्रत्येक वृद्धावस्था पेंशनर्स के खाते में तीन-तीन माह की पेंशन जमा करा दी गई है, जो शेष रह गए हैं, उनके खातों में जल्द ही पेंशन पहुंचने की उम्मीद है।- एनपी मिश्रा, जिला समाज कल्याण अधिकारी