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भक्तों को काल से बचाते हैं कालेश्वर बाबा

Mon, 03 Aug 2015 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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भक्तों को मुसीबत और काल से बचाने के लिए बाबा कालेश्वर धाम भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया है। मान्यता है कि बाबा के दर्शन करने वाला प्रत्येक भक्त जीवन पर परेशानियों से बचा रहता है। बीहड़ क्षेत्र में मंदिर होने के बावजूद भक्त मंदिर पर पहुंचते हैं।
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मंदिर में सोमवार को उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
बीहड़ पट्टी स्थित भगवान बाबा  कालेश्वर धाम में सावन के सोमवार की तैयारियां शुरू हो गईं है। मंदिर में श्रद्धा और आस्था के चलते प्रतिवर्ष सावन में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।


क्षेत्र के जुहीखा, कैथौली, सेंगनपुर, बवाइन, असेवा, असेवटा के अलावा राजस्थान व मध्य प्रदेश से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन को आते है। भगवान कालेश्वर महाराज का दूध, दही और जलाभिषेक किया जाता है। इसके बाद धतूरा, चंदन, बेलपत्र के साथ भोले बाबा के दरबार में प्रसाद चढ़ाकर लोग मनौती मांगते है।
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मन्नत पूरी होने पर होता है भंडारा- मुरादगंज। भक्तों की ओर से मंदिर में समय-समय पर भंडारा चलता रहता है। भंडारा भक्त अपनी स्वेच्छा से कराते है।


मंदिर महंत अश्वनी कुमार कहते हैं कि जिस भक्त की मनोकामना पूरी होती है। वह भक्त कालेश्वर धाम के दरबार में दोबार सिर झुकाने आता है और भंडारे का आयोजन करता है।



सावन मास के चलते मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। दूरदराज से आने वाले भक्तों के ठहराव की समुचित व्यवस्था की गई है। इस बार विशेष वाद्य यंत्र से भगवान कालेश्वर महाराज की आरती की जाएगी।- पंडित अश्वनी कुमार ( कालेश्वर मंदिर के महाराज)



सैकड़ों साल पुरानी ख्याति है मंदिर की- मुरादगंज (औरैया)। भगवान कालेश्वर महाराज की ख्याति सैकड़ों वर्ष से चली आ रही है। तुलसीदास से लेकर आधुनिक युग में दस्यु की आस्था का केंद्र यह मंदिर रहा है। स्थानीय लोगों ने मंदिर की आस्था के बाबत कई जानकारी दी हैं।



सावन मास में विधि विधान से की गई पूजा का फल भक्तों को अवश्य मिलता है। कालेश्वर बाबा की पूजा- अर्चना से अकाल मृत्यु तक टल जाती है। भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।- - पंडित रामबाबू द्विवेदी भागवताचार्य


 
क्वारी और यमुना नदी के मिलन स्थल पर भगवान शिव का मंदिर होने के कारण भगवान शंकर कालेश्वर महाराज कहलाए हैं। भक्तों की यह आस्था आज भी जारी है। - शिववीर दुबे (ग्राम, कैथोली )




आस्था और श्रद्धा के चलते बीहड़ क्षेत्र के इस मंदिर में दस्यु दल भगवान कालेश्वर को प्रसन्न करने के लिए घंटा व ध्वज (पताका ) फहराते थे। कभी दस्युओं के लिए यह शरणस्थलीय भी रहा है।- - निहाल सिंह गुर्जर (ग्राम, सराय इमलिया)


 
आदि काल में रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास भी इस प्राचीन मंदिर की शरण में आए थे। यह स्थल उन्हें इतना रमणीय और शांत लगा कि उन्होंने भगवान कालेश्वर महाराज के दर्शन करने के बाद रामचरित मानस के कुछ अंश भी लिख डाले। - प्रतीक त्रिपाठी, समाजसेवी (ग्राम हैदरपुर)
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