औरैया। मौसम में परिवर्तन ने धान के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले बारिश फिर चटक धूप व पानी भराव वाले स्थानों पर धान की फसल में झुलसा व विभिन्न प्रकार के रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे धान के किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के पौध संरक्षण विशेषज्ञ अंकुश झा ने बताया कि किसान अपनी धान की फसल में बीमारियों की रोकथाम के लिए खेतों का पानी तत्काल निकाल दें। शाम के समय कार्बेंडाजिम प्लस हेक्साकोनाजोल (ताकत) 30 ग्राम एवं एस्ट्रोप्लटोसाइक्लीन 2.5 ग्राम दवा को 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। धान की फसल में तना गलन रोग की रोकथाम के लिए शाम में टूबेकोनाजोल नाम दवा को 30 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। धान की फसल में कड़ुआ रोग की रोकथाम के लिए तत्काल खेतों का पानी निकाल दें और उर्वरकों का प्रयोग रोक दें, शाम में कार्बेंडाजिम प्लस मेंकोजेब नामक दवा को 30 ग्राम को प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव फसल में दो बार छिड़काव करें।
प्रथम छिड़काव धान की बाली निकालने की अवस्था में और दूसरा छिड़काव 15 से 20 दिन के बाद करें। यदि फसल में रोग आ रहे हैं तो कड़ुंआ बीमारी से ग्रसित पौधों को अतिशीघ्र खेतों से निकालकर नष्ट कर दें।
गौरतलब है कि बारिश ने किसानों का पूरा साथ दिया। इसका परिणाम है कि इस बार धान की फसल अच्छी है लेकिन धान में अब झुलसा रोग ने किसानों की नींद उड़ा दी है। इस रोग से बचाने के लिए किसान फसल में दवा का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन दवा का कोई असर नहीं हो रहा है। जैतपुर, कुल्हूपुर, मधुपुर, नरोत्तमपुर, आनेपुर, कखावतू, पंहर, मिहौली आदि में झुलसा रोगका प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों एकड़ धान की फसल की पत्तियां पीली होकर झुलस जा रही हैं। दवा का छिड़काव भी काम नहीं कर रहा है। ऐसे में किसान की मेहनत और लागत डूबती नजर आ रही है।