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धमाके से दहल उठता दिल, घर वापसी की सता रही चिंता

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हिमांशू से वीडियो कालिंग करके बात करते माता-पिता। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। रूस की सैन्य कार्रवाई के बीच जनपद के कई छात्र अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उनके परिजन बेहद चिंतित है। यूक्रेन के हालात को लेकर दिन रात परिजनों को अपने बच्चों की फिक्र लगी हुई है।
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परिवार के लोगों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से मदद की गुहार की है। परिजनों ने बताया कि वे बच्चों के संपर्क में हैं, बच्चे बता रहे हैं कि हालात अभी सामान्य नहीं है। धमाकों की आवाज सुनते ही बच्चे सहम से जाते हैं। सभी को अपने बच्चों की वापसी की चिंता सता रही है।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे जिले के कई छात्र व तमाम ऐसे नौकरी पेशे वाले लोग है जो पिछले एक वर्ष से वहीं थे। उनहें हालात खराब होने की जानकारी थी, लेकिन किसी की फ्लाइट नहीं बुक हो सकी तो कोई इस उम्मीद में नहीं निकला कि युद्ध नहीं होगा। अब उनके घर वाले लगातार वीडियो कालिंग व फोन कर पल पल की जानकारी ले रहे हैं। वहीं कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके घरो में गम का माहौल है।
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हालात बेहद खराब, हॉस्टल में फंसे छात्र
बिधूना। बिधूना के ग्राम असजना निवासी सेवानिवृत्त फौजी ब्रजपाल सिंह चौहान का पुत्र शिव प्रताप यूक्रेन के ड्रेनप्रो शहर में फंसा हुआ है। ब्रजपाल ने बताया कि वह अपने पुत्र से हर घंटे बात कर रहे हैं। गांव व पड़ोस के लोग भी उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। ब्रजपाल ने बताया कि बेटा निप्रॉपेट्रोस राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय से एमबीबीएस चतुर्थ सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है वह फरवरी 2021 में गया था।
फोन पर हुई बातचीत में शिव प्रताप ने बताया कि हालात बहुत खराब है। धमाका होते ही दिल दहल जाता है। उसके साथ औरैया जिले के कई छात्र भी हैं जो हास्टल में फंसे हैं। वहीं बिधूना अदिती यादव भी फंसी है, उनके पिता मुकेश यादव भी फोन करके हाल चाल ले रहे है।
परिजन गृह मंत्रालय की बेवसाइट पर छात्रों की वापसी कराए जाने को लेकर पल पल की जानकारी ले रहे हैं। बताया कि उन्हें केंद्र सरकार आश्वासन दे रही है कि भारतीय छात्रों को जल्द वापस घर भेजा जाएगा।
दहशत के बीच महीने भर का घरेलू सामान किया इकट्ठा
दिबियापुर। यूक्रेन में फंसे एमबीबीएस के छात्रों के परिजनों में दहशत का माहौल है। परिजन दिन में यूक्रेन में फंसे पुत्र पुत्रियों से कई बार वीडियो कॉल से बात कर उनका हाल जान रहे हैं। परिजनों ने जल्द से जल्द यूक्रेन में फंसे छात्रों को भारत वापस बुलाये जाने की मांग की है। सेवानिवृत्ति सैनिक अरविंद राजपूत निवासी गेल कंप्रेसर स्टेशन कैनाल रोड का बड़ा बेटा दीपेंद्र का एमबीबीएस में छठवां सेमेस्टर है।
दीपेंद्र की माँ गीता देवी बताती हैं कि उनकी बिधूना में रहने वाली रिश्ते में बहन का बेटा गोलू भी यूक्रेन से एमबीबीएस कर रहा है।गोलू का पांचवा वर्ष है। वह और उनके रिश्तेदार लगातार दोनों की सलामती और जल्द से जल्द वापस भारत लौटने की दुआ कर रहे हैं। अरविंद का कहना है कि दीपेंद्र से उनकी दिन में दो से तीन बार वीडियो कॉल हो रही है दीपेंद्र ने बताया है कि वह इवानो शहर में हैं। यह हिस्सा यूक्रेन में पश्चिमी ओर पड़ता है।
अभी यूक्रेन के पूर्वी इलाके में ही बमबारी हो रही है।दीपेंद्र ने यूक्रेन के हालत खराब होने के कारण घरेलू सामान खरीदने के लिए गुरुवार को ही रुपये मंगाए थे। दीपेंद्र ने लगभग महीने भर का घरेलू सामान इकट्ठा कर लिया है।
घर वापसी की सता रही चिंता
दिबियापुर। शास्त्री नगर निवासी सराफा व्यवसायी मोहन पोरवाल का पुत्र हिमांशु पोरवाल का एमबीबीएस में आठवां सेमेस्टर है। उनके पिता मोहन पोरवाल का कहना है कि हिमांशु पोरवाल जिस स्थान पर है। वहां पर अभी ज्यादा परेशानी नहीं है। उन्हें पूरा भरोसा है जल्द ही भारत सरकार कोई अच्छा कदम उठाएगी और उनका बेटा जल्द ही वापस लौट आएगा। जुलाई 2020 में छुट्टी पर हिमांशु घर आया था।
बीते पांच फरवरी 2021 को वापस लौट गया था। तब से वह घर नहीं लौटा। उन्हें और परिजनों को हिमांशु की चिंता सता रही है। यूक्रेन में भय के माहौल के बीच हिमांशु वीडियो कॉल करके जहां परिजनों को ढाढस बंधा रहा है। हिमांशु का कहना है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे और वह और उसके सभी साथी वापस लौट आएंगे।
एरवाकटरा। यूक्रेन के ओडैसा की नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही बिधूना की शिवानी भी फंसी है। उनके घर वालों का इन दिनों बुरा हाल है। पिता पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल उनकी लगातार बात हो रही है।
जिससे वह बेटी का हाल जान पा रहे हैं, लेकिन उन्हें डर सता रहा है कि कहीं युद्ध में नेटवर्क न बंद हो जाए। बेटी ने कई दिनों का राशन जुटा लिया है अभी वह सुरक्षित स्थान पर है।
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