औरैया। गर्भनाल तुरंत काटने से बच्चे में खून की कमी हो सकती है। एक से तीन मिनट रुककर यदि गर्भनाल काटी जाए तो ऐसी समस्या नहीं होगी। क्योंकि तब तक गर्भनाल की मदद से बच्चे को पर्याप्त मात्रा में खून पहुंच चुका होगा। नोएडा में इंडिया एक्सपो के दौरान हुए पीडियाट्रिक कार्यक्रम में अपनी इस खोज को जिले के डॉक्टर बृजेंद्र सिंह ने साझा किया। इसकी सराहना महिला एवं बाल स्वास्थ्य मंत्री स्मृति ईरानी ने भी की।
नोएडा में 19 से 23 मार्च तक हुए कार्यक्रम में देश-विदेश के छह हजार से ज्यादा डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल स्वास्थ्य मंत्री स्मृति ईरानी ने किया था। कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर डॉक्टरों ने अपने-अपने विचार रखे और खोज प्रस्तुत कीं। इनमें औरैया के जनेतपुर गांव निवासी डॉ. बृजेंद्र सिंह ने भी अपनी खोज को सबके समक्ष रखा।
बताया कि देश के बच्चों को खून की कमी से बचाया जा सकता है। इसके लिए नवजात की गर्भनाल को कुछ देर के लिए खुला छोड़ दें और उसे तुरंत न काटें। एक से तीन मिनट के अंतराल में गर्भनाल काटने से बच्चे के शरीर में पर्याप्त मात्रा में खून पहुंच जाता है और बच्चा स्वस्थ रहता है।
डॉ. बृजेंद्र सिंह ने बताया कि अधिकतर बच्चों में देखा गया है कि जिनकी गर्भनाल काटने में देर हो जाती है, उनमें आयरन और हीमोग्लोबिन की मात्रा ज्यादा निकलती है। सरकार की गाइडलाइन के आधार पर 60 से 80 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है। बच्चों के दिमाग का विकास शुरुआती उम्र में होता है, ऐसे समय में इनका स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।
कई बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की बजाए कम हो जाती है। इस खोज के लिए डॉ. बृजेंद्र सिंह को ऑल इंडिया तीसरा स्थान मिला। उन्हें अवार्ड व प्रशस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया। आईएपी (इंडिया एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक) के अध्यक्ष डॉ. रमेश व डॉ. पीयुष गुप्ता ने उनकी सराहना की।
इस प्रक्रिया को लागू कर सकती है सरकार
डॉ. बृजेंद्र सिंह ने बताया कि खोज के संबंध में महिला एवं बाल स्वास्थ्य मंत्री स्मृति ईरानी व संसद सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से दिल्ली स्थित मंत्री कार्यालय में आईएपी टीम की मुलाकात हुई। स्वास्थ्य मंत्री ने आईएपी के योगदान की काफी सराहना की। मंत्रालय आईएपी के साथ मिलकर काम कर सकता है।
मंत्रालय के साथ जल्द ही एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जो निश्चित रूप से अपनी सामुदायिक गतिविधियों में आईएपी के लिए एक बड़ी छलांग होगी। डॉ. सिंह का कहना है कि मंत्री स्मृति ईरानी को यह
खोज काफी पसंद आई है। वह सरकार से बात कर इस खोज को सरकारी रूप से देश भर में लागू करा सकती हैं। इस विषय पर डॉक्टरों, नर्स व आंगनबाड़ी को प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईएपी टीम में 35 हजार डॉक्टर हैं और 340 जिला शाखाएं हैं। आईएपी टीम निरंतर बच्चों के संबंध में खोज करती रहती है।