फोटो07एयूआरपी 17- विश्राम गृह में अंदर भरा कबाड़
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औरैया। औरैया शहर स्थित गल्ला मंडी में किसानों के लिए बनाए गए कृषक विश्राम गृह दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। किसानों के इस गृह में कबाड़ भर दिए जाने से किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। किसान ठहरने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। वहीं, मंडी प्रशासन किसान विश्राम गृह के सुंदरीकरण के लिए बजट न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
देश व प्रदेश की सरकार लगातार किसानों को सबल बनाने के लिए लाभकारी योजनाएं चलाकर हितैषी होने का दावा कर रहीं हैं। इसके बाद भी किसानों को उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। दूर दराज से धान, बाजरा आदि की बिक्री करने के लिए पहुंच रहे किसानों को रात हो रही है। ठहरने के लिए उचित प्रबंध न होने पर परेशानी उठानी पड़ रही है। गल्ला मंडी में किसानों के आराम के लिए बनाए गए किसान विश्राम गृह के हालात यह है कि वह कबाड़ घर होकर रह गया है। आराम गृह में टूटी मशीनें, टूटे छलने भरे हुए हैं। यही नहीं अनदेखी के चलते चूहों ने भी विश्राम गृह के बाहर के परिसर की जमीन को पूरी तरह से नीचे-नीचे खोदकर खोखला कर दिया है। देखरेख और साफ-सफाई के अभाव में खिड़की पर चारों तरफ जाला लगा हुआ है। देखने से ऐसा लगता है कि कई सालों से इसकी रंगाई-पुताई भी नहीं कराई गई है। बिजली फिटिंग भी जगह-जगह से टूट चुकी है। सुविधाएं न मिलने से किसान परेशान हैं और सरकार को कोसते नजर आ रहे हैं।
किसान बोले
कानपुर देहात के थाना सिकंदरा क्षेत्र के गांव अनवापुर निवासी किसान उमाशंकर गल्ला मंडी में बाजरा बेचने आए थे। कहते हैं कि उनकी उम्र 70 वर्ष हो चुकी है। ऐसे में ज्यादा देर तक बैठने में थोड़ा असहज महसूस करते हैं। यदि कृषक विश्राम गृह दुरुस्त होता तो थोड़ा आराम करने को मिल जाता। लेकिन वहां तो गंदगी और कबाड़ भरा है।
65 वर्षीय किसान कन्हैया लाल कहते हैं कि उनका गांव महटौली है। कभी-कभी रात में गल्ला मंडी में देर भी हो जाती है। ऐसे में आढ़ती की आढ़त ही वहां किसान का विश्राम गृह बनता है। जबकि गल्ला मंडी में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया कृषक विश्राम गृह अधिकारियों की अनदेखी का शिकार होकर खस्ताहाल हालत में है।
जिम्मेदार बोले
कृषक विश्राम गृह को दुरुस्त व उसका सुंदरीकरण कराकर किसानों के विश्राम योग्य बनाने के लिए डीडीसी मंडी निर्माण किरन सिंह को जानकारी दी गई थी। उन्होंने बजट न होने की बात कही। साथ ही बताया कि अभी लखनऊ से कोई टेंडर नहीं हो रहा है। बजट मिलने पर ही सुंदरीकरण कराया जाएगा।
- अरुण गुप्ता, गल्ला मंडी सचिव, औरैया।