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दो बालरोग चिकित्सकों के भरोसे तीसरी लहर से चुनौती

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फोटो 18एयूआरपी17- पीकू वार्ड में लगे उपकरणों को दुरस्त करती स्टाफ नर्स - फोटो : AURAIYA
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औरैया। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर समाप्त होने वाली है। तीसरी लहर में सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ने की आशंका है। जिसकी तैयारियों को लेकर शासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच बार-बार बैठकें की जा रहीं हैं। जिले में विभाग के पास मात्र दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिनके सहारे अधिकारी तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। जो उनके लिए चुनौती है। हाल फिलहाल में यह चिकित्सक चिचौली अस्पताल में बनाए गए पीकू वार्ड में तैनात किए गए हैं।
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कोरोना संक्रमण की दो लहरों में बच्चे भी संक्रमित हुए हैं। शून्य से 10 साल के 350 से अधिक बच्चे संक्रमित रहे हैं। जिसमें एक बच्चे की मौत भी हुई है। तीसरी लहर में सबसे अधिक असर बच्चों पर रहेगा। जिसके लिए विभाग संसाधन तो जुटा रहा है लेकिन चिकित्सकों की कमी को पूरा करने में कामयाबी हासिल नहीं कर पा रहा है।
औरैया जनपद में कुल आबादी 16 लाख के करीब है। जिसमें बच्चों की शून्य से 10 साल की उम्र के बच्चों की संख्या सवा चार लाख के करीब है। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में शून्य से पांच साल तक ढाई लाख से अधिक बच्चे शामिल हैं। जनपद में बच्चों की संख्या को देखते हुए उन्हें तीसरी लहर के दौरान सुविधाएं दे पाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा। स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सूत्र बताते हैं कि बैठकों के दौरान मुख्यमंत्री लगातार कह रहे हैं, तीसरी लहर आने से पहले इंतजाम पूरे कर लें। उपकरणों के साथ-साथ ही प्राइवेट चिकित्सकों को भी हायर कर लें। जिले के अधिकारी उपकरण जुटाने में तो लगे हैं। उन्हें चलाने वालों का इंतजाम करने में तत्परता नहीं दिखा रहे है। (संवाद)
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जिले में पहले से ही चिकित्सकों की कमी
जनपद में संचालित होने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य सालों से भगवान भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। यहां चिकित्सकों की कमी है। यह अस्पताल एक या दो चिकित्सकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। यदि चिकित्सक किसी कारणवश छुट्टी पर होता है। तो वहां की व्यवस्थाएं फार्मासिस्ट के कंधों पर होती हैं। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में सभी अस्पतालों में पीडियाट्रिक स्टाफ तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
सीएमओ बोलीं
चिचौली अस्पताल में पीकू वार्ड तैयार किया जा चुका है। जहां स्टाफ बढ़ाने के प्रयास अभी जारी है। जरूरत पड़ने पर निजी चिकित्सकों का भी सहारा लिया जाएगा। शासन से भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है।
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-डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
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