फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट के अभाव में शोपीस बन कर रह गई राजकीय लाइब्रेरी

विज्ञापन
फोटो01एयूआरपी 15- लाइब्रेरी के अंदर मेज पर रखीं पुस्तकों पर चढ़ी धूल - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
औरैया। विद्यार्थियों व परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राजकीय लाइब्रेरी का संचालन किया गया था। लोगों को उम्मीद जगी थी कि जरूरी पुस्तकें, पत्रिकाएं व पेपर उपलब्ध हो सकेंगी, लेकिन बजट के अभाव में लाइब्रेरी शोपीस बनी हुई है।
विज्ञापन

ककोर मुख्यालय के पास संचालित राजकीय लाइब्रेरी में कोरोना के बाद से नई पाठ्य सामग्री मुहैया नहीं हो पा रही है। लाइब्रेरी में आने जाने वाले लोगों को पुस्तकें, पत्रिकाएं व अखबार नहीं मिल रहे हैं। 2017 में इस लाइब्रेरी को हैंडओवर किया गया था। तत्कालीन लेखाधिकारी ने बिलों का भुगतान नहीं किया। सरकारी पचड़े से बचने के लिए जिम्मेदार 2018 से बजट की मांग नहीं की। बजट व देखरेख के अभाव में पुरानी पुस्तकें भी धूल फांक रहीं हैं। राजकीय लाइब्रेरी का अतिरिक्त कार्यभार इटावा के लाइब्रेरियन केबी दोहरे के पास होने के कारण वह भी प्रतिदिन लाइब्रेरी नहीं आते हैं। इससे राजकीय लाइब्रेरी पर अव्यवस्था हावी है।
बोले जिम्मेदार
कोरोना के बाद से अब लाइब्रेरी में कोई भी नहीं आता है। इसलिए पत्रिकाएं व पेपर भी नहीं मंगाए जाते हैं। साथ ही अब आधे से अधिक कार्यालय में डीआईओएस का कार्यालय संचालित है। जिससे जगह का भी अभाव बना हुआ है। इसके साथ ही 2017 में तत्कालीन लेखाधिकारी ने मैग्जीन व पेपर के बिलों का भुगतान भी नहीं किया। 2018 से बजट के लिए भी कोई मांग पत्र नहीं भेजा गया है।
विज्ञापन

- केबी दोहरे, लाइब्रेरियन राजकीय लाइब्रेरी औरैया/इटावा
राजकीय लाइब्रेरी का चार्ज इटावा के लाइब्रेरियन केबी दोहरे के पास है। लेकिन वह कभी भी नहीं आते हैं। जबकि उन्हें सप्ताह में तीन दिन औरैया लाइब्रेरी में बैठना चाहिए। साथ ही यहां न तो पत्रिकाएं मंगाई जाती हैं और न ही पेपर मंगाए जाते हैं। जिससे लाइब्रेरी आने वाले लोगों को मायूसी ही हाथ लगती है।
विज्ञापन

-एमपी सिंह, डीआईओएस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें