मृतक मंजुल चौबे के बोर्ड को साफ करते आशीष। संवाद
नारायणपुर निवासी आशीष सुबह अपने अधिवक्ता के चैंबर पर पहुंचे। वहां उन्होंने सबसे पहले अपने अधिवक्ता भाई मंजुल और बहन सुधा की फोटो फोन पर देखकर कर उन्हें याद किया। इसके बाद आशीष की नजर कचहरी में लगे मंजुल के बोर्ड पर गई, क्योंकि मृतक नियमित वकालत करते थे। इस पर उन्होंने कपड़े से बोर्ड को साफ किया। आशीष का कहना है कि फैसले को लेकर पूरी रात परिवार के लोग ठीक तरीके से सो नहीं पाए। तीन बजे तक सभी लोग जगे थे।
कमलेश के खिलाफ दर्ज हैं 41 मुकदमे
पुलिस के अनुसार सदर कोतवाली सहित जिले के कई थानों समेत अन्य जिलों में भी गंभीर मामले दर्ज हैं। इसमें हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर, रंगदारी सहित अन्य मुकदमे शामिल हैं। वादी आशीष ने बताया कि कई ऐसे मामले भी हुए हैं। जिनमें पाठक के खौफ के चलते वादी ने प्राथमिकी दर्ज ही नहीं कराई। इसके अलावा कई गंभीर मामले में वादी ने समझौता कर लिया।