बिधूना। तहसील क्षेत्र में पांडु नदी का साइफन बंद होने से जल निकासी बाधित थी। इससे किसानों की 400 बीघा से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी। मामला सामने आने पर तहसील प्रशासन ने रात में ही पोकलेन मशीन से साइफन की सफाई का काम शुरू करा दिया। प्रशासन की इस तत्परता से पानी की निकासी शुरू हुई तो सैकड़ों किसानों ने राहत महसूस की।
पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी गांव रायपुर, कैथावा, विधिपुरवा, अजीत पुरवा व बराहार समेत कई गांवों के आसपास के खेतों तक पहुंच गया था। जल निकासी के मार्ग का साइफन बंद होने व नदी में बालू व सिल्ट जमा होने से पानी का बहाव बाधित था। इस पर एसडीएम कमल कुमार वर्मा मौके पर अधिकारियों के साथ पहुंचे और पोकलेन मशीन से साइफन की सफाई व पानी निकासी का कार्य शुरू कराया।
एसडीएम ने रात में मौके पर रहकर अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद सुबह तक लगातार मशीन से काम कराया गया। रविवार को पानी की निकासी शुरू होने के बाद खेतों में भरा पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। शनिवार से रविवार तक एसडीएम ने कई बार मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया।
पहली बार दिखी प्रशासन की ऐसी तत्परता
पांडु नदी के साइफन की सफाई और पानी निकासी को लेकर तहसील प्रशासन की सक्रियता से किसानों में संतोष नजर आया। किसानों का कहना था कि जलभराव की समस्या के बीच प्रशासन ने जिस तेजी से कार्रवाई की, उससे फसल को बचाने की उम्मीद जगी है। मौके पर एसडीएम के साथ नायब तहसीलदार और बीडीओ समेत संबंधित अधिकारी-कर्मचारी भी पहुंचते रहे और स्थिति की जानकारी लेते रहे।
जलभराव की पुनरावृत्ति हुई तो होगी कार्रवाई - एसडीएम
एसडीएम कमल कुमार वर्मा ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि बारिश के मौसम में जल निकासी की व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। जहां भी नाले, साइफन या जल निकासी के रास्ते अवरुद्ध होने की संभावना है, वहां पहले से सफाई कराई जाए। लापरवाही के कारण यदि दोबारा जलभराव की स्थिति पैदा होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
फोटो-7- पोकलैंड मशीन से होती साइफन की सफाई।संवाद