औरैया। एनआईए जांच के बाद सराफा कारोबारी भाइयों से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की भी गहनता से जांच की जा रही है। एक ही नंबर पर दो नाम के शस्त्र लाइसेंस और दो यूनिक नंबर के बाद अब एक और मामला सामने आया है।
इसमें पहले के सीरियल नंबर का शस्त्र लाइसेंस बाद की तारीख में जारी हुआ, जबकि बाद के सीरियल नंबर का शस्त्र लाइसेंस पहले ही जारी हो गया। ये सभी तथ्य कहीं न कहीं गड़बड़ी की आशंका को बल दे रहे हैं।
असलहा और कारतूसों की तस्करी के आरोपों में घिरे सराफा कारोबारी कमलकांत वर्मा एनआईए जांच के बाद अब तक सामने नहीं आए हैं। एनआईए जांच के साथ-साथ प्रशासन ने भी उनके व भाइयों के नाम जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच शुरू कर दी है। इसमें कदम-कदम पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ये सभी तथ्य कहीं न कहीं फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहे हैं।
एक ही नंबर पर रविकांत वर्मा और संजय कुमार के नाम दो शस्त्र लाइसेंस और दो यूनिक आईडी नंबर जारी होने के बाद अब कमलकांत वर्मा और अजयकांत वर्मा के शस्त्र लाइसेंसों से जुड़ा मामला सामने आया है। कमलकांत वर्मा का शस्त्र लाइसेंस इटावा से 10 अगस्त 1997 को जारी किया गया था। इसका लाइसेंस नंबर 5392/औरैया है।
इसके ठीक बाद शस्त्र लाइसेंस संख्या 5393/औरैया भी इटावा से ही जारी किया गया, जो कमलकांत के भाई अजयकांत वर्मा के नाम है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस शस्त्र लाइसेंस के जारी किए जाने की तारीख आठ अगस्त 1997 है।
इस लाइसेंस की संख्या तो आगे की है, लेकिन तारीख पुरानी है। आखिर कैसे दो दिन बाद पीछे के सीरियल का शस्त्र लाइसेंस जारी हो गया, ये बड़ा सवाल है। यह कैसे संभव है कि जो लाइसेंस बाद में जारी हुआ उसकी तारीख पहले की हो, जबकि बाद की तारीख में जारी लाइसेंस का नंबर पहले का हो। ये दोनों ही तथ्य आपस में विरोधाभासी हैं।
ऐसे में जांच के दायरे में ये दोनों शस्त्र लाइसेंस भी हैं। मामले को लेकर जांच की जा रही है।