औरैया। 10 लाख रुपये व स्कॉर्पियो कार की मांग करने वाले ससुरालीजन की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। मामला सहार थाना क्षेत्र का है। यहां एक महिला ने 23 अप्रैल को पति समेत छह ससुरालीजनों पर दहेज उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें मोहम्मद आदिल, अब्दुल आबिद, आसिया बेगम, मोहम्मद यूसुफ, साबिया और फौजिया को आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों की ओर से पेश अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर पैरवी नहीं की। अधिवक्ताओं की ओर से अर्जी पर बल न दिए जाने के आशय का पृष्ठांकन भी आदेश पत्र के हाशिये पर दर्ज किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने याचिका निरस्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र बल न दिए जाने के कारण निरस्त किए जाने के योग्य है। (संवाद)
ईको कार की सुपुर्दगी की अर्जी खारिज
जिला एवं सत्र न्यायालय ने लवेश यादव की ओर से दायर वाहन सुपुर्दगी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। प्रार्थी ने थाना सहायल में सीज अपनी ईको कार को छुड़ाने के लिए अदालत में गुहार लगाई थी। लवेश यादव ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर दावा किया था कि ईको कार उसकी दिवंगत पत्नी पूर्णिमा यादव के नाम पंजीकृत है। तर्क दिया कि पत्नी की मृत्यु के बाद वह कानूनी वारिस है और वाहन खुले में खड़े होने के कारण खराब हो रहा है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने वाहन छोड़े जाने का विरोध किया। पत्रावली और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने पाया कि लवेश यादव स्वयं वाहन का पंजीकृत स्वामी नहीं है। प्रार्थी मुकदमे में स्वयं अभियुक्त है। अदालत ने अर्जी को बलहीन मानते हुए निरस्त कर दिया है।