एरवाकटरा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना में हुए फर्जीवाड़े की जांच के लिए गठित कमेटी मंगलवार को जांच कर लखनऊ लौट गई। टीम ने फिलहाल जांच रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया। इससे शिकायतकर्ताओं में निराशा है।
उनका आरोप है कि तिरंगे की खरीद और सीआईएफ फंड में घोटाला किया गया है। विकास खंड क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना में करीब 1084 महिला स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनमें ज्यादातर समूह की महिलाएं कम पढ़ी-लिखी हैं।
इन्हीं में से एक मामले में कुदरकोट क्लस्टर के इंदिरा गांधी महिला प्रेरणा सीएलएफ (सामुदायिक निवेश कोष) की अध्यक्ष सावित्री ने डीएम को शिकायती पत्र दिया था। इसमें एनआरएलएम ब्लॉक मिशन की मैनेजर पर 15 अगस्त 2024 को तिरंगा वितरण के नाम पर तीन लाख बीस हजार रुपये बिधूना के प्रेस संचालक के खाते में भेजने पर फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया था।
वहीं, पखनगोई की पदाधिकारी शानू चतुर्वेदी और तुर्कपुर की अध्यक्ष रजनी शाक्य ने भी शिकायत की थी कि उमरैन, एरवा व बरौनाकलां क्लस्टर में कई समूहों को जारी हुआ एक लाख 10 हजार रुपये का सीआईएफ फंड पोरवाल ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। इसमें कुछ को घटिया फर्नीचर दिया गया। जबकि कुछ को कोई सामान नहीं मिला।
इसकी शिकायत पर लखनऊ से मंगलवार को जांच टीम आई थी। टीम ने यहां पर महिला समूहों से बयान लिए और अभिलेखों की जांच की। जांच के बाद बिना रिपोर्ट बताए टीम वापस लखनऊ चली गई, हालांकि टीम में आए राज्य बीसी सखी के परामर्शदाता नीलांबुज ने जांच में घालमेल होने के संकेत जरूर दिए हैं। वहीं, जांच रिपोर्ट न मिलने से शिकायतकर्ता मायूस हैं।