औरैया। पारंपरिक खेती से हटकर सह फसली खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। वजह यह है कि इससे कम लागत में ज्यादा मुनाफा हो रहा है। सदर ब्लॉक के गांव जनतेपुर धौरेरा के किसान सुरेश राजपूत सह फसली खेती के लिए अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं। वह अपने खेत में धनिया की पैदावार कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
किसान सुरेश राजपूत बताते हैं कि उनके पास मात्र ढाई बीघा खेत है। पहले पारंपरिक खेती करके लागत निकालना मुश्किल हो रहा था। किसान पाठशाला में उद्यान विभाग द्वारा सह फसली खेती के उपाय सुझाए गए। इससे प्रभावित होकर वह चार साल से सह फसली खेती कर रहे हैं। उन्होंने एक बीघा में धनिया, शलजम, लहसुन, मेथी, मूली आदि सब्जी उगाई है। आधा बीघा में सिर्फ धनिया की बुवाई की है।
सुरेश बताते हैं कि धनिया 45 दिनों में तैयार हो जाती है। बरसात को छोड़कर वह बराबर धनिया की खेती करते हैं। इन दिनों बाजार में एक बिस्वा से भी आधे हिस्से की धनिया से पूरा बोरा भर जाता है। बाजार में यह 1500 से 1600 रुपये में बिकता है। शेष डेढ़ बीघा में गन्ना की फसल किए हैं। गन्ना की फसल भी तैयार हो चुकी है।
सुरेश के मुताबिक एक बीघा में सह फसली खेती करने में मात्र चार हजार रुपये का खर्चा आता है, लेकिन इससे उनकी आमदनी अच्छी-खासी हो जाती है। लघु सिंचाई विभाग से उन्होंने छह इंची बोरिंग भी कराई हैं। वहीं, सुरेश की देखा देखी गांव के अन्य किसानों का भी अब पारंपरिक खेती छोड़कर सह फसली खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसके लिए गांव के किसान सुरेश से जानकारी लेने भी आते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी अनूप चतुर्वेदी का इस बाबत कहना है कि किसान उन्नति विधि अपनाकर व सह फसली खेती करके अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को उद्यान विभाग की ओर से प्रशिक्षण से लेकर सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं।