औरैया। दिबियापुर कस्बे के फफूंद रोड के किनारे एक बड़े हिस्से से लेकर गांव कैंझरी, जमुहां, वैसुंधरा व घेरा में पिछले सात साल से चली आ रही जलभराव की समस्या का अब खत्म हो गई है। इससे 20 हजार की आबादी को बड़ी राहत मिली है। यह मुद्दा अमर उजाला ने उठाया था।
अब दो माह से अभियान चलाकर नगर पंचायत दिबियापुर ने अपनी सीमा से बाहर जाकर मैनपूठ नाले की पांच किलोमीटर दायरे में गहराई से सफाई कराई है। 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। वहीं जलमग्न रहने वाली जमीन का पानी निकल चुका है। दिबियापुर कस्बा में बस स्टैंड के पास वन विभाग की जमीन का नजारा साल 2019 से तालाब जैसा रहता है। दिबियापुर कस्बा समेत पड़ोसी गांव जमुहां, कैंझरी, घेरा व वैसुंधरा की जलनिकासी मैनपूठ नाले से होती है।
यह नाला गांवों से होते हुए औरैया रोड किनारे आता है। कई जगहों पर इस नाले के साइफन चोक होने से जलनिकासी अवरुद्ध चल रही थी। कस्बा के फफूंद रोड किनारे से लेकर घेरा, कैंझरी व जमुहां की 200 बीघा से ज्यादा जमीन साल के आठ माह जलमग्न रहती थी। यहां पर फसलों का उत्पादन नहीं हो रहा था। वहीं कस्बा के मुहल्ला इंद्रानगर, गुंजन रोड और विकास कुंज में भी जलभराव होता था।
इन चारों गांवों और नगर पंचायत के मोहल्लों में इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने मुद्दा बनाया था। अधिकारियों ने इस पर सिंचाई विभाग व नगर पंचायत को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। उधर स्थानीय लोगों ने इस समस्या को हल कराने के लिए विरोध प्रदर्शन भी किए थे।
इस समस्या को हल करने के लिए नगर पंचायत प्रशासन पिछले तीन माह से मैनपूठ नाले की सफाई का अभियान चला रही है। इसमें हाइड्रा से लेकर मैन्युअल काम कराए जा रहे हैं। सालों से चोक पड़ा बस स्टैंड के पास का नाला साफ कर दिया गया है। ऐसे में यहां की जलनिकासी दुरुस्त हो गई है। बारिश में लोगों को जलभराव के संकट से नहीं जूझना पड़ेगा।
फोटो-26- यहां सालभर भरा रहता था पानी, अब बदल गया है नजारा। संवाद
फोटो-26- यहां सालभर भरा रहता था पानी, अब बदल गया है नजारा। संवाद