देवकली मंदिर स्थित बैरियर आखिर किसकी सरपरस्ती में चल रहा था, कौन था इस ठेके का मालिक, पुलिस अभी तक इन बातों का पता नहीं लगा सकी है।
अगर पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी थी तो करीब एक वर्ष से चल रहे इस बैरियर पर रोक क्यों नहीं लगाई। अवैध रुप से लगाए जा रहे बैरियर पर रोक न लगाया जाना प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रहा है।
मंगलवार को तहसीन दिवस में फोन पर डीएम को मिली शिकायत के बाद देवकली मंदिर स्थित बैरियर पुलिस द्वारा मारा गया छापा गले की फांस बनता नजर आ रहा है।
पुलिस ने जब छापामारी की थी तो पुलिस को मौके से बैरियर पर काटी जा रही पर्ची में गाड़ी का कोई नंबर नहीं डाले जाते मिला था। केवल अंतिम चार अंक ही उस पर दर्ज किए जा रहे थे।
सूत्रों की माने तो बैरियर के लिए ठेका हुआ है। प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति को कमिश्नर को भेजा गया है। मगर अभी तक फाइल पर कमिश्नर के हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। सवाल यह उठता है कि बिना किसी कागजात के आखिर बैरियर किस आधार पर चलाया जा रहा था और इस बैरियर को संचालित करवाने के पीछे किसका हाथ था।
तहसील दिवस में आई शिकायत के आधार पर की गई कार्रवाई में पुलिस ढीली पड़ती नजर आई। सूत्रों की माने तो इस पूरे मामले में सफेदपोश सत्ता पक्ष के नेता का हाथ हैं, जिसके ही इशारे पर एक वर्ष से बैरियर संचालित हो रहा था।
इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत राणा प्रताप सिंह ने बताया कि फाइल के संबंध में उन्हें अभी जानकारी नहीं है। संबंधित लिपिक से आज आए नहीं है। वैसे बैरियर लगाए जाने पर रोक लगाई है।