फफूंद। माहे-ए-रमजान की 19 फरवरी से शुरूआत हो चुकी है। करीब 22 वर्षों बाद पहली बार रमजान सर्द मौसम में आया है।
उधर, खराब मौसम की वजह से चांद नजर नहीं आया, लेकिन देर शाम तस्दीक होते ही मस्जिदें नमाजियों से भर गईं। लोगों ने रात तक नमाज अदा की और सुबह भोर सहरी करके रोजा रखा।
बृहस्पतिवार को कस्बे के मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर खासी रौनक नजर आई। इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होने से रमजान की तिथियां हर वर्ष बदलती हैं। लगभग 33 वर्षों में रमजान सभी ऋतुओं का चक्र पूरा करता है, इसलिए लंबे अंतराल के बाद अब यह फिर सर्द मौसम में आया है।
मदीना मस्जिद मोहल्ला तरीन के इमाम हाफिज असरार ने कहा कि मुकद्दस रमजान का महीना अल्लाह की ओर से इंसान के लिए खुद को सुधारने का बेहतरीन अवसर है। यह महीना सिर्फ भूखे और प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी सोच, अपने आचरण और अपने दिल को पाक करने का जरिया है।
उन्होंने कहा कि रमजान का असली मकसद तब पूरा होता है, जब समाज के गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों का ख्याल रखा जाए। इफ्तार और सहरी में दूसरों को शामिल करना, भूखों को खाना खिलाना और जरूरतमंदों की मदद करना रमजान की सच्ची इबादत है।
उधर, रमजान के पहले जुमे की नमाज को लेकर क्षेत्र की मस्जिदों में विशेष तैयारियां की गई हैं। साफ-सफाई, पानी, रोशनी और नमाजियों की सुविधा से जुड़े सभी इंतजाम दुरुस्त कर लिए गए हैं। पहले जुमे पर बड़ी संख्या में रोजेदारों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
फोटो-10-हाफिज असरार। संवाद