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Auraiya News: दुष्कर्म के मामले लापरवाही पर डॉक्टर-दारोगा और फॉरेंसिक टीम पर भी होगी कार्रवाई

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औरैया। पांच वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने 25 वर्ष की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने जांच एजेंसियों और चिकित्सकीय तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने मामले के विवेचक, मेडिकल परीक्षण करने वाले डॉक्टर और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के कर्मचारियों विभागीय कार्रवाई के लिए कहा है। इस संबंध में मुख्य सचिव, डीजीपी तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को रिपोर्ट भेजी गई है।
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विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार मिश्र ने अपने फैसले में कहा कि विवेचना, मेडिकल परीक्षण और फॉरेंसिक रिपोर्ट में बरती गई लापरवाहियों ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में इस तरह की चूक न केवल जांच की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पीड़ित को समय पर न्याय मिलने में भी बाधा बनती है।
अदालत ने तत्कालीन विवेचक दरोगा सुरजीत सिंह की विवेचना को लापरवाहीपूर्ण और अक्षम करार दिया। वहीं, पीड़ित बच्चे का मेडिकल करने वाले डॉक्टर पर चिकित्सीय परीक्षण के आवश्यक मानकों का पालन नहीं करने गंभीर चूक माना। इसके अलावा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा की ओर से समय पर रिपोर्ट न देने को भी लापरवाही पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि एफएसएल की देरी से मुकदमे की सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी हुई। इसी आधार पर एफएसएल निदेशक और संबंधित विधि वैज्ञानिकों के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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इसी मामले में अदालत ने आरोपी तैय्यब पुत्र सरफू को पांच वर्षीय मासूम से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास और 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित बच्चे को देने का भी आदेश दिया गया है।
22 सितंबर 2021 को थाना अजीतमल क्षेत्र में पांच वर्षीय बालक घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान गांव का ही युवक तैय्यब उसे बहलाकर खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घर लौटने पर बच्चे के शरीर से खून बह रहा था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अगले दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। करीब पांच साल बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने मामले में अंतिम फैसला सुनाया।
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