अपर सत्र न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम सत्य प्रकाश द्विवेदी ने थाना फफूंद क्षेत्र के ग्राम पाता से एक 12 साल के बालक अनुरुद्ध कुमार का अपहरण करने व बाद में उसकी हत्या करने के मुख्य आरोपी राम जीवन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से भी दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार पाता निवासी महेश चंद्र ने थाना फफूंद में रिपोर्ट लिखाई है कि गत 5 जुलाई 2004 को मेरा 12 वर्षीय पुत्र अनुरुद्ध कुमार उर्फ भोला दिन के लगभग 4 बजे से गायब हुआ। उसका फिरौती के लिए अपहरण किया गया। बाद में अपहृत बालक का शव राम जीवन निवासी दुर्गा नगर दिबियापुर के घर से बरामद हुआ।
अपहरण व हत्या का यह मुकदमा आठ लोग अमित कुमार, लल्लू सिंह, रघुराज, नीलेश उर्फ संजू, पट्टू उर्फ अतर सिंह, रामजीवन, लल्ला उर्फ विपति विनाशक व राम प्रकाश के खिलाफ 364 ए, 302, 149 का मामला पंजीकृत हुआ। आरोप पत्र के आधार पर यह मुकदमा एडीजे सत्य प्रकाश द्विवेदी की कोर्ट में चला।
अभियोजन की ओर से एडीजीसी रमेश चंद्र मिश्रा व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने सात लोगों को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर बरी कर दिया। जबकि मुख्य आरोपी रामजीवन पुत्र सुखवासी लाल निवासी दुर्गापुर दिबियापुर को धारा 364 ए में आजीवन कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड, 302 में आजीवन कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सत्र लिपिक चंद्रशेखर शुक्ला व पेशगार जंग बहादुर सिंह के अनुसार अभियुक्त द्वारा अर्थदंड अदा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।