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मासूम चाहत की जिंदगी बचाना ही अब चाहत

Thu, 24 Oct 2013 05:40 AM IST
Auraiya
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औरैया। दिल में दो-दो छेद लिए तिल-तिल मरती तीन वर्षीय बेटी की जिंदगी बचाने के लिए भटक रहे बेबस पिता की उम्मीदें अब राष्ट्रपति पर टिकी हैं।
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मासूम के इलाज के लिए एक साल से भटक रहे पिता ने मायूसी मिलने के बाद
अब राष्ट्रपति से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
शहर के नरायनपुर निवासी मनीष गुप्ता का दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो गई है। तीन साल की मासूम बेटी चाहत को तिल-तिल मरते देख उनका कलेजा मुंह को आ रहा है। जन्म से ही चाहत के दिल में दो छेद होने के साथ उसके पैर भी खराब हैं । पिता मनीष उसकी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। बेटी के इलाज में अपना सब कुछ गंवा चुके मनीष के सामने आर्थिक संकट ने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। वर्ष 2011 में उन्होंने अपनी बदहाल माली हालत का हवाला देकर बेटी के इलाज के लिए प्रदेश सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। इस पर प्रदेश सरकार ने डीएम के जरिये जांच कराई। लेकिन चाहत के इलाज के लिए मनीष को प्रदेश सरकार से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।
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छात्र जीवन से सपा से जुड़े मनीष गुप्ता को इस बात का मलाल है अपनी ही सरकार में उनकी सुनवाई नहीं हो रहा है। दो साल से मनीष लेखपाल,डीएम से लेकर विधायक, सांसद से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन बेटी बचाओ आंदोलन चलाने वाले सपा सरकार से मायूसी ही हाथ आई है। चारों तरफ से मायूस मनीष गुप्ता ने अब राष्ट्रपति को पत्र भेज कर दिल की मरीज अपनी बेटी की जान बचाने के लिए आर्थिक मुदद मुहैया कराने की गुहार लगाई है।
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