अमर उजाला ब्यूरो
उरई। प्रशासन के जिले को दो अक्तूबर तक पूर्णतया ओडीएफ करने के लक्ष्य पर अब प्रधानों ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानों का कहना है कि सिर्फ कोरी वाहवाही लूटने के लिए इस असंभव लक्ष्य को रखा है और लक्ष्य पूरा करने के नाम पर प्रशासन प्रधानों का उत्पीड़न कर रहा है। इसको लेकर प्रधानों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। इस दौरान उन्होंने अन्य समस्याओं को भी उठाया।
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष अजय कुमार दीक्षित के नेतृत्व में दर्जनों प्रधानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने जिले को ओडीएफ करने के लिए दो अक्टूबर तक का समय रखा है, जो की पूर्णतया असंभव है. लेकिन फिर भी जिला प्रशासन काम के नाम पर सिर्फ प्रधानों का उत्पीड़न कर रहा है। प्रधानों का कहना है कि जिस स्थिति में जिला के हालात हैं उससे जिला ओडीएफ दो अक्तूबर 2019 तक ही हो सकता है। इससे पहले यह सिर्फ कोरी कल्पना ही है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश में भी कोई संस्था 12000 रुपए में शौचालय बनाने को तैयार नहीं है। फिर भी प्रधान किसी तरह शौचालयों का निर्माण करा रहे हैं, लेकिन फिर भी अधिकारी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए बेइज्जत करते हैं।
उन्होंने मांग की कि प्रधानों का शौचालय के नाम पर उत्पीड़न बंद किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रधान का मानदेय बढ़ाने, ग्राम पंचायतों में कार्यदायी संस्था काम करने पर ग्राम पंचायत से स्वीकृति लेना, हैंडपंप रीबोर का दायित्व के लिए ग्राम पंचायत को अलग से धनराशि उपलब्ध कराना, आदि मुददों को भी उठाया और जल्द से जल्द निराकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर 26 सितंबर को प्रधान संघ हर प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन करेगा। इस अवसर पर ब्रजेंद्र द्विवेदी, जयवीर सिंह, रघुपाल, राहुल सेंगर, लल्लू महाजन, शिवम आदि प्रधान उपस्थित रहे।
-प्रधानों ने ही उठाए योजना पर सवाल, प्रशासन पर लगाए उत्पीड़न के आरोप