बेला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे न होने से गर्भवती महिलाओं को खाली पेट 50 किमी दूर जिला जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है। इतनी लंबी यात्रा करने से गर्भस्थ शिशु पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में सुरक्षित मातृत्व का दावा खोखला साबित हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना दम तोड़ रही है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांच कराने का निर्देश शासन की ओर से दिया गया है, मगर यह योजना सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 35 हजार गर्भवती महिलाओं का चिकित्सीय देखरेख व इलाज की सुविधा दी जा रही है, लेकिन उनके अल्ट्रासाउंड की समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेला में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने से यहां की गर्भवती महिलाओं को 50 किमी यात्रा कर जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ता है।
जिला पंचायत अध्यक्ष कमल दोहरे के गोद लिए सीएचसी बेला पर भी जांच की सुविधा नहीं है। सीएचसी एरवाकटरा को राज्यसभा सांसद गीता शाक्य ने गोद लिया है। सीएचसी सहार को कन्नौज लोकसभा सांसद सुब्रत पाठक ने गोद लिया है, लेकिन यहां भी अल्ट्रासाउंड न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक्सरे मशीन भी नहीं। इससे जरूरतमंद लोगों को 45 किमी दूर जिला मुख्यालय पर जाना पड़ता है।
गर्भवती रीता बताती हैं कि अल्ट्रासाउंड के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाती। इस कारण उन्हें डग्गामार वाहन से जिला अस्पताल जाना पड़ता है। अगर अल्ट्रासाउंड की सुविधा बेला सीएचसी में हो जाए तो अच्छा रहे।
गर्भवती अर्चना का कहना है कि बेला सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इस कारण प्राइवेट सेंटरों पर जाकर 600-700 रुपये में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को होती है।
गर्भवती आबदा बेगम कहती हैं कि बार-बार जिला अस्पताल आने-जाने में बच्चे को खतरा रहता है। अगर बेला सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा हो जाए तो गर्भवती महिलाओं को काफी राहत होगी। समय भी बचेगा।
गर्भवती शरीना बेगम बताती हैं कि जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लाइन लगती है। इतना लंबा सफर वहां जाकर भी वापस आ गयी और प्राइवेट अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच के सभी संसाधन के साथ अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की जा रही है। रेडियोलाजिस्ट की कमी होने के कारण ये समस्याएं हैं। इसके लिए शासन से मांग की जा रही है। -डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ।
फोटो-11एयूआरपी-02-रीता- फोटो : AURAIYA
फोटो-11एयूआरपी-03-आबदा- फोटो : AURAIYA
फोटो-11एयूआरपी-04- अर्चना- फोटो : AURAIYA
फोटो-11एयूआरपी-05- सीएचसी में मरीजों को देखते डॉक्टर सिद्धार्थ।संवाद- फोटो : AURAIYA