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मतदाता तो हैं लेकिन मतदान का नहीं मिलता मौका

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औरैया। इनकी ख्वाहिश तो है कि मतदान करें, पर हर मर्तबा चुनाव में इनकी ये ख्वाहिश अधूरी रह जाती है। मतदाता पहचानपत्र होने के बाद भी इन्हें मतदान केंद्र से लौटा दिया जाता है, ये पीड़ा इनको सालती रहती है। हम बात कर रहे हैं लोहा पीटा समुदाय के लोगों की।
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इस समुदाय के कई ऐसे भी हैं जो बुढ़ापे की दहलीज पर है, लेकिन एक बार भी मतदान नहीं किया है। मतदान करने का मौका न दिए जाने पर इस बार कइयों ने अपने कार्ड ही नहीं बनवाए और ना ही इस संबंध में जानकारी कि उनका नाम इस बार सूची में है भी या नहीं।

दोपहर लगभग तीन बजे कानपुर रोड पर लोहा पीटा समुदाय के बीच जब ‘अमर उजाला’ की टीम पहुंची तो वहां बैठी एक महिला व एक पुरुष ने पूछा क्या चाहिए। टीम ने कहा कुछ नहीं और उनसे पूछा कि उनके पास मतदाता पहचानपत्र है या नहीं। इतना सुनते ही वहां बैठी महिला बोल पड़ी मेरे पास और पीछे जो हैं उनके पास कार्ड तो है, ‘हमें पहले वोट नहीं डालन दओ गओ, तो जा बार आराम से बैठे हैं।’ बताया कि हम लोग सड़क किनारे डेरा डालकर जीवन गुजारते है।
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तभी वहां अंदर की ओर चारपाई पर लेटे बुजुर्ग भागीरथ सिंह बोले रोटी कमाने के लिए जवानी से वह बुढ़ापे की दहलीज पर जा पहुंचे है, लेकिन मतदाता पहचानपत्र बनने के बाद भी मतदान से वंचित रहना पड़ता है। मतदान के दिन जैसे-तैसे पता करके मतदान केंद्र पहुंचते है, लेकिन उन्हें लौटा दिया जाता है। इस बार हम वोट डालने भी नहीं जाएंगे।

वहां बैठे फूल सिंह बोले इस रोड पर उनके समुदाय के लोग काफी संख्या में हैं। इस बार तो कोई उन लोगों से पूछने भी नहीं आया कि उनका वोट बना है या नहीं। कई लोग ऐसे भी जिनके वोट कट गए है। कहा कि हमें सरकार की किसी योजना का लाभ नहीं मिलता।

फूल सिंह बताते हैं कि पहले थे मतदाता, अब जा बार मतदाता है कि नहीं अब पता नहीं हैं। मन जरूर करता है कि मतदान करें, लेकिन लौटाए जाने की वजह से इस बार हिम्मत नहीं पड़ी कि पता करे कि वह वोट डालने कहां जाएंगे और लिस्ट में नाम है या नहीं। सूरज का कहना है कि सभी जगह जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन सड़क किनारे लोगों के वोट बनाने और उन्हें मतदान के बारे में कोई अधिकारी व कर्मचारी बताने भी नहीं आया।

जानकारी करने पर मालूम हुआ कि इस समुदाय के कई लड़कियां और लड़के ऐसे हैं जो एक साल पहले 18 साल की आयु पूरी तरह चुके हैं, लेकिन उनका पहचान पत्र नहीं बना है। महिला सावित्री ने बताया कि एक बार उसने फार्म जमा किया था लेकिन मतदाता पहचान पत्र नहीं बना। जबकि सास का है लेकिन वोट नहीं डालने दिया गया।
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