मुहम्मदाबाद। बिजली विभाग के अभियान के अंतर्गत करीब एक सप्ताह से दो गांवों की आपूर्ति ठप पड़ी है। बकायेदारी और अवैध कनेक्शन के कारण विभाग की टीम ने पूरे गांव की आपूर्ति ठप कर रखी है। इससे नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को सबस्टेशन पर पहुंचकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों के चक्कर में पूरे गांव की बिजली काटना ठीक बात नहीं है। बिजली काटने के बाद कोई अधिकारी दोनों गांव में झांकने तक नहीं जा रहा है।
बता दें कि 13 जनवरी को अभियान के अंतर्गत टीम ने कुसमिलिया और डकोर गांव की बिजली काट दी थी। अधिकारियों का कहना था कि अधिकांश कनेक्शन और अवैध है, और कई लोगों पर बिजली का बिल भी बकाया है। इस कारण ही आपूर्ति ठप करने का फैसला किया गया है। लगातार बिजली संकट झेल रहे लोग शनिवार को कुसमिलिया स्थित सबस्टेशन पहुंचे और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीण हिमांशू, राहुल और पवन आदि का कहना है कि जिनके कनेक्शन लगे हैं, उनके यहां साल साल भर तक कोई बिजली कर्मी बिल देने नहीं आता है और न ही रीडिंग नोट की जाती है। फिर बिल बाकी हुआ तो ग्रामीणों का क्या दोष। शिवसिंह व शैलेंद्र कुमार का कहना है कि विभाग ने महीनों से गांवों में कोई कैंप भी नहीं लगाया है, कि लोग नए कनेक्शन ले सके। इसके बावजूद कनेक्शन काट दिए गए।
वहीं बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता किशन सिंह का कहना है कि बिना बकायेदारी अदा किए गांव की बिजली फिलहाल नहीं जोड़ी जा सकेगी। डकोर निवासी मालती का कहना है कि बोर्ड की परीक्षाएं आने वाली है। घर पर बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है।
विभाग को चाहिए कैंप लगाकर कनेक्शन बांटे, फिर जो नया कनेक्शन न ले, उसकी बिजली काट दी जाए। डकोर के ही जियालाल का कहना है कि बिजली न होने से गांव की चक्की भी बंद पड़ी है, घर पर ही गेहूं पीसकर काम चला रहे हैं। कुसमिलिया के सुरेंद्र का कहना है कि मोबाइल तक नहीं चार्ज हो पा रहे है। पड़ोस के गांव जाकर मोबाइल चार्ज कराना पड़ रहा है।
सप्ताह भर से दो गांव में बिजली संकट
पानी व मोबाइल चार्ज करने को भटके
अमर उजाला ब्यूरो