अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। सरकारी अस्पतालों में पंजीकरण की कागजी प्रक्रिया के दिन अब खत्म होने वाले हैं। इलाज को आने वाले प्रत्येक मरीज का ऑनलाइन पंजीकरण कराए जाने की तैयारी चल रही है। एनआईसी के सहयोग से अस्पतालों के नेटवर्क को कनेक्ट करने का एक्शन प्लान बनाया जाएगा। ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में मरीजों से संबंधित पूरा विवरण तो फीड होगा ही साथ ही उन्हें अपनी पहचान भी दर्ज करानी होगी।
शासन अस्पतालों में अब पंजीकरण की प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी कर रहा है। सभी सरकारी अस्पतालों में जल्द ही ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली विकसित कराई जाएगी। अब तक मरीजों को यहां इलाज कराने से पहले काउंटर से एक रुपये का कागजी पर्चा बनवाना पड़ता था। पर्चा पंद्रह दिन के लिए मान्य होता है। इसी आधार पर मरीज 15 दिन तक उपचार करा सकते हैं।
अब शासन स्तर से पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन कराने की तैयारी चल रही है। इसके लिए जिला चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय, सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के पंजीकरण काउंटरों को नेटवर्किंग से जोड़ा जाएगा। विभागीय सॉफ्टवेयर पर अस्पतालों में आने वाले मरीजों का पूरा विवरण फीड कराया जाएगा। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हीरा सिंह का कहना है कि शासन स्तर से ऑनलाइन पंजीकरण के संकेत मिले हैं। एनआइसी से प्रक्रिया पूर्ण कराई जानी है। इस सिस्टम से मरीजों को फायदा होगा।
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में मरीज से संबंधित पूरा विवरण फीड कराया जाएगा, इसमें मसलन मरीज का नाम, पिता का नाम, स्थायी एवं अस्थायी पता, मोबाइल नंबर, ब्लड ग्रुप आदि होगा। इतना ही नहीं, प्रत्येक मरीज की पुष्टि के लिए उनसे पहचान पत्र (आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र) भी मांगा जाएगा।
पंजीकरण की कागजी प्रक्रिया में विभागीय जानकार अक्सर हेराफेरी कर लेते थे। पंजीकरण स्लिप में से एक पर्ची को फाड़कर बाद में मरीजों से सुविधा शुल्क लेकर बैक डेट में उसका प्रयोग कर मरीजों अथवा उनके तीमारदारों को अनुचित लाभ देते थे। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि कई बार ऐसी शिकायतें भी मिल चुकी थीं। अब ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा के बाद यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
- अस्पतालों का नेटवर्क कनेक्ट करने को बन रहा एक्शन प्लान
-पहचान पत्र होगा अनिवार्य
-अभी हो जाता था दस्तावेजों में हेरफेर