सदर तहसील में खाली पड़ा लेखपालों का कमरा।
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छह सूत्री मांगों को लेकर लेखपालों की हड़ताल पर प्रदेश सरकार भले ही चुप हो लेकिन इसका असर जिले की जनता पर पड़ने लगा है। सरकार क ो राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशान तहसील से आवेदन बनवाने वाले हैं। इस हड़ताल का सबसे अधिक असर छात्र वर्ग पर है।
लेखपाल छह सूत्री मांगों को लेकर 17 दिन से हड़ताल पर हैं। इसका सबसे अधिक असर छात्र वर्ग को उठाना पड़ रहा है। लेखपालों की हड़ताल 23 सितंबर से शुरू हुई थी। तब से वह पूरी तरह से हड़ताल पर हैं। न तो लेखपाल घर पर काम कर रहे और न ही तहसीलों में। लेखपालों की हड़ताल से जन सेवा केंद्रों पर भी छात्रों की भीड़ बार-बार आवेदनों की जानकारी के लिए पहुंच रही है। सबसे अधिक सदर तहसील में आवेदन अटके हुए हैं। 17 दिन की हड़ताल में जिले भर में आय, जाति, मूल निवास और खतौनी के लगभग 35477 आवेदन लटके हैं। सदर तहसील में आय के 4578 के करीब और जाति के 5220 के करीब आवेदन लटके हैं। जिले की तीनों तहसीलों में आय के 11928 और जाति के 11908 आवेदन रुके हैं। आवेदन पत्रों की यह संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। आवेदन जारी न होने पर छात्रों की बेचैनी दिनों दिन बढ़ रही है।