उरई। उन्नाव के हसनगंज में कूड़े के ढेर में दवाएं मिलने से शनिवार को मेडिकल कालेज परिसर में हड़कंप मचा रहा। प्राचार्य सुरेश चंद्र ने कालेज परिसर में चल रही ओपीडी का निरीक्षण कर मरीजों से भी बात की और दवाओं के पर्चे और दवाओं का स्टाक चेक किया। उन्होंने डॉक्टरों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों के साथ किसी तरह की हीलाहवाली न की जाए, सभी को उपलब्ध दवाएं दी जाएं। दवाओं के मामले में प्राचार्या का कहना है कि एक दो दिन में वे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
बता दें कि शुक्रवार को लखनऊ बांगरमऊ रोड पर बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं और जालौन मेडिकल कालेज ओपीडी के पर्चे पाए गए थे। मामले की जानकारी होते ही मेडिकल कालेज, उरई में भी हड़कंप की स्थिति रही। प्राचार्य ने भी स्वयं ओपीडी में जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान वे पर्चा बनाने वाले काउंटर पर भी पहुंचे और मरीजों से बातचीत कर उनकी दिक्कतों के बारे में भी पूछा।
फिर उन्होंने दवा वितरण काउंटर का निरीक्षण कर मौजूद स्टाक चेक किया। प्राचार्य के तेवर देख डॉक्टरों और कर्मचारियों में भी अफरातफरी बनी रही। दवाओं के मामले में प्राचार्य का कहना है कि उन्नाव में मिली दवाएं किस कंपनी की है, फिलहाल उन्हें जानकारी नहीं है। मेडिकल कालेज से एक्सपायरी दवाएं संबंधित कंपनी को ही वापस करा दी जाती है। फिर ये 2014 की दवाएं कूड़े के ढेर तक कैसे पहुंची, इसकी जांच कराएंगे। सोमवार को सीएमस के साथ मीटिंग के बाद जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
बाहर से लिखी जाती हैं दवाएं
जिला अस्पताल हो या फिर मेडिकल कालेज दोनों ही जगहों पर मरीजों को सरकारी दवाएं देने के बजाए डॉक्टर ज्यादातर बाहर की ही दवाएं लिखते हैं। इस कारण बड़ी मात्रा में सरकारी दवाएं रखे रखे ही एक्सपायरी हो जाती है। जिन्हें अधिकारियों की नजर से बचाने के लिए या तो जला दिया जाता है या फिर फेंक दिया जाता है। साल भर पूर्व भी मेडिकल कालेज परिसर में कुछ दवाइयों को जलाया गया था। बाद में इस मामले की लीपापोती भी कर दी गई थी।
उन्नाव में कूड़े के ढेर में एक्सपायरी दवाएं मिलने से मचा हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो