एट-कदौरा। दो दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टि से जनपद का किसान परेशान हैं। हालांकि मंगलवार को कहीं से भी बारिश की कोई सूचना नहीं है, लेकिन रविवार और सोमवार की रात हुई बारिश और ओलों ने खासतौर पर मटर और मसूर की फसलों की सूरत बिगाड़ दी है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी गहरी हो गई है। चिंता है कि यदि अब मौसम का मिजाज बिगड़ा तो सारी फसल ही चौपट हो जाएगी।
बता दें कि जनपद का किसान इस वक्त वैसे ही अन्ना पशुओं की समस्या झेल रहा है। उस पर रही सही कसर दो दिन में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने पूरी कर दी है। इस कारण मसूर, मटर, चना और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि नुकसान कितना हुआ है, इसका अब तक प्रशासन स्तर पर कोई अंदाज नहीं लगाया गया है।
कदौरा प्रतिनिधि के मुताबिक कदौरा निवासी छोटे लाल व गंगाराम बागी ने बताया कि 18 बीघा खेत बलकट में लेकर लाही व मटर की फसल बोई थी और उसकी कटाई भी हो रही थी। पानी गिरने से सूखी फसल का दाना झड़ गया। इससे काफी नुकसान होने की आशंका है। लक्ष्मीकांत निवासी बागी ने अपने 30 बीघे खेत में मसूर व मटर की फसल बो रखी थी, जिसमें फूल भी निकल आए थे लेकिन पानी से फूल झड़ गए।
किसान दुर्गा प्रसाद, संतराम ने भी अपने-अपने 15 व 12 बीघा खेत में चना व मसूर की फसल बोई थी, उनके भी फूल झड़ गए। किसानों ने बताया कि अन्ना से तो खेत की रखवाली कर फसल को बचा ले गए लेकिन कुदरत के आगे उनकी एक न चली। एट प्रतिनिधि के मुताबिक सोमवार की देर शाम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण लाही की फसल बिछ सी गई। इससे भी काफी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खेतों में कटी पड़ी मटर और मसूर को भी काफी नुकसान पहुंचा है। उनका दाना सड़ सा गया है।
मंगलवार की सुबह फसलों की दुर्दशा देख किसान अपना माथा पकड़कर बैठ गए। किसानों का कहना है कि अन्ना से तो परेशान थे ही अब ओलों ने भी परिवार का सुख चेन लूट लिया। किसान धीरेंद्र पटेल का कहना है कि यह तो गनीमत थी कि पांच से छह मिनट ही ओले गिरे, कहीं 10-15 मिनट तक कुदरत का कहर टूटता तो सैकड़ों किसान मुसीबत में पड़ जाते।
दो दिन की बारिश, ओलावृष्टि से बिगड़ी फसलों की सूरत
अमर उजाला ब्यूरो