अयाना। यमुना नदी का जलस्तर शुक्रवार रात से घटने लगा है। मगर बीहड़ पट्टी के छह गांवों के लोगों की समस्या अभी कम नहीं हुई है। बाढ़ के पानी से इन गांवों के 1003 घरों में 212 घर बाढ़ से प्रभावित हैं।
जिले में शुक्रवार शाम छह बजे पर यमुना नदी का जलस्तर 117.43 मीटर मापा गया था। प्रशासन की ओर से शनिवार दोपहर को कराई गई माप में नदी का जलस्तर 116.96 मीटर पर रहा। हालांकि यमुना नदी अभी खतरे के निशान 113 मीटर से 3.96 मीटर ऊपर बह रही है। नदी के पानी ने अभी लोगों के घरों को नहीं छोड़ा है।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति बीहड़ पट्टी के गांव फरिहा की है। गांव के बीचों-बीच पानी भरने से पूरा गांव तीन हिस्सों में बंट गया है। इसमें से एक हिस्सा तो बाढ़ की जद से बाहर है मगर दो हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं।
शनिवार दोपहर को ततारपुर निवासी विक्रम फौजी व राजपाल ने बड़ी गूंज में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था करवाई। वहीं राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य, सदर विधायक गुड़िया कठेरिया ने ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित गांव फरिहा का निरीक्षण किया। एसडीएम अजीतमल ने निखिल राजपूत ने बताया कि राजस्व टीमें बाढ़ प्रभावित परिवारों का सर्वे भी कर रहीं हैं।
बाढ़ से अयाना क्षेत्र के बीहड़ के गांव जुहीखा के 204 घरों में से 26, असेवा के 236 घरों में छह, फरिहा के 158 घरों में से 100, बीझलपुर के 252 घरों में से 34 व बड़ी गूंज के 44 घरों में 26 घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सभी पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया है। साथ ही उन्हें बाढ़ राहत सामग्री भी वितरित की जा चुकी है। गांवों में अभी भी सर्वे जारी है प्रशासन प्रत्येक बाढ़ तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। (संवाद)
दो गांव के बच्चे दूसरे स्कूल में भेजे जा रहे
औरैया। यमुना नदी में आई बाढ़ के बाद परिषदीय स्कूलों का बीहड़ में संचालन काफी कुछ बेपटरी हुआ है। हालांकि बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की अव्यवस्था न हो इसे लेकर जुगाड़ व्यवस्था की गई है। सिकरोड़ी में बच्चों की कक्षाएं हनुमानगढ़ी में चल रही हैं।
अस्ता गांव के बच्चों को नौरी गांव स्थित परिषदीय स्कूल में पढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों की ड्यूटी भी इसी तरह से लगाई जा रही है। बीएसए संजीव कुमार ने बताया कि दो स्कूलों की कक्षाएं बाढ़ के चलते पड़ोसी गांव में सुरक्षित माहौल में लगाई जा रही हैं। (संवाद)