दिबियापुर (औरैया)। केंद्र और प्रदेश सरकारें सोलर एनर्जी के अधिकाधिक प्रयोग के प्रोत्साहन के लिए कई प्रयोग कर रहीं हैं। इस बीच दिबियापुर के असेनी गांव में लगे एक कोल्ड स्टोरेज में 200 किलोवाट का सोलर संयंत्र लगाकर व्यापारी ने छोटी इंडस्ट्रीज में सोलर एनर्जी का अभिनव प्रयोग शुरू किया है। यह सोलर संयंत्र लगाकर कोल्ड स्टोरेज का सालाना 20 लाख रुपये का बिजली का बिल कम कर लिया है।
असेनी ग्राम पंचायत में लगे भारत कोल्ड स्टोरेज को चलाने के लिए 14 फरवरी 2019 को 200 किलोवाट का सोलर संयंत्र लगाया गया था। भारत कोल्ड स्टोरेज के स्वामी विनोद यादव बताते हैं कि पीक सीजन में प्रति माह लगभग एक लाख यूनिट बिजली का प्रयोग होता था। पीक सीजन में लगभग 6 लाख रुपये बिजली का बिल आता था। बिजली बिल को कम करने के लिए उन्होंने कोल्ड स्टोरेज को सोलर एनर्जी लगाने की ठानी। कोल्ड स्टोरेज की छत पर 200 किलोवाट बिजली उत्पादन के लिए 650 सोलर पैनल लगवाए गए। इनकी कुल लागत लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये आई। लेकिन जब सालाना बजट देखा गया तो सोलर एनर्जी प्रयोग करने से लगभग 20 लाख रुपये बिजली का बिल कम आया है।
सोलर एनर्जी प्रयोग करने का ऐसे आया विचार
कोल्ड स्टोरेज के स्वामी विनोद यादव के अनुसार जिस कंपनी के सोलर पैनल उनके कोल्ड स्टोरेज में लगे हैं। उस कंपनी के 5.75 मेगावाट के सोलर पैनल उन्होंने ही गेल पाता प्लांट में लगवाए थे। पूरी जानकारी लेने पर सोलर एनर्जी के का प्रयोग करने की बात उनके दिमाग में आई थी।
सोलर पैनल ऐसे करता है काम
कोल्ड स्टोरेज की छत पर लगे सोलर पैनल के साथ बैट्री का प्रयोग नहीं होता। टूट-फूट के अलावा 25 वर्षों तक सोलर पैनल की वारंटी कंपनी की होती है। सोलर पैनल गर्मियों में सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बिजली उत्पादित करते हैं। रात में कोई बिजली उत्पादित नहीं होती है। सोलर एनर्जी के डीसी करंट को एसी करंट में बदलने के लिए कन्वर्टर लगा है।
ई मीटर लगे तो प्रतिमाह बर्बाद हो रही 25 हजार यूनिट बिजली का हो उपयोग
विनोद यादव के अनुसार पूर्व में केंद्र सरकार की योजना के तहत सोलर एनर्जी पैदा करने वाले संयंत्रों में ई-मीटर लगाया जाना था। ई-मीटर लग जाने के बाद सोलर संयंत्र से अतिरिक्त उत्पादित बिजली को बिजली विभाग ले सकता है। ई-मीटर लगाए जाने की मांग वह भी कर चुके हैं। क्योंकि आफ सीजन के समय नवंबर से फरवरी के बीच कोल्ड स्टोरेज में लगे सोलर संयंत्र से प्रतिमाह लगभग 25 हजार यूनिट उत्पादित बिजली बर्बाद हो रही है। वैसे केंद्र सरकार ने सोलर संयंत्रों से उत्पादित बिजली 4.17 रुपये प्रति यूनिट खरीदने का नियम बना रखा है। यदि ई-मीटर लगने लगे तो अधिकांश छोटी फैक्ट्रियां सोलर संयंत्र लगाकर बिजली उत्पादन करने लगेंगे।