औरैया हादसे में घायल दो और मजदूरों ने दम तोड़ा
कानपुर-इटावा हाईवे के हादसे में मृतकों की संख्या 28 हुई
आर्थिक तंगी की वजह से शव लेने नहीं पहुंचे एक के परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा/औरैया। औरैया में हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में घायल दो और मजदूरों ने सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या अब 28 हो गई है।
सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में सोमवार सुबह दम तोड़ने वाला प्रवासी मजदूर झारखंड के बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र में खिराबेड़ा गांव निवासी नीरू कालिंदी (35) पुत्र रखोहरी कालिंदी था। मौत की सूचना फोन पर परिवार को दी गई। फोन पर हुई बातचीत में मृतक नीरू के भतीजे विकास कालिंदी ने लंबी दूरी और गरीबी की वजह से शव लेने के लिए सैफई आने में असमर्थता जताई। विकास ने बताया कि उसके चाचा राजस्थान में अकेले रहकर मार्बल कटिंग का काम करते थे। चाची समेत उनकी दो बेटियां व एक बेटा यहीं झारखंड में रहते हैं। लॉकडाउन में काम बंद हो जाने पर चाचा घर लौट रहे थे। उसका कहना था कि औरैया जिले के एसडीएम से उसकी मोबाइल पर बात हुई है। उनसे शव को घर पहुंचाने का आग्रह किया था, जो उन्होंने मान लिया है।
औरैया के डीएम अभिषेक सिंह के निर्देश पर नीरू का शव सोमवार देर रात एंबुलेंस से औरैया लाया गया। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित ने बताया कि शव को मंगलवार सुबह मृतक के परिवार तक भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इस बीच सोमवार शाम को सैफई में उपचाराधीन एक और मजदूर की मौत हो गई। वह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया निवासी मिलन कालिंदी का पुत्र प्रकाश कालिंदी था।
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एक घायल को मिली अस्पताल से छुट्टी
औरैया। अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित ने बताया कि बोकारो (झारखंड) निवासी नरेश मेहतो पुत्र देव मेहतो को सैफई से उपचार पूरा होने पर छुट्टी मिल गई है। उन्हें भी सरकारी देखरेख में औरैया लाया गया। मंगलवार सुबह आगे का सफर कराने की व्यवस्था कराई जाएगी। फिलहाल उन्हें पांडेय गेस्ट हाउस में बने क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। नंगे पांव होने के कारण चप्पल व अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई गई हैं। तहसीलदार सदर राजकुमार चौधरी ने दो हजार रुपये नगद भी दिए। इससे पूर्व अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित व एडीएम एमपी सिंह ने सैफई पहुंचकर घायलों का हालचाल भी जाना।
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महाराष्ट्र में फंसा भाई
विकास ने बताया कि उसके बड़े भाई बंटी कालिंदी महाराष्ट्र के दौलावढ़ गांव में फंसे हैं। वहां वह मजदूरी करते थे, अब घर आना चाहते हैं। विकास ने अपने भाई को घर पहुंचाने की भी गुहार लगाई। उसने कहा कि परिवार इतना गरीब है कि किराया भाड़ा वहन नहीं कर सकता।
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भरतपुर में पुलिस ने चढ़ाया था ट्राला में
औरैया। हादसे के घायल नरेश कुमार मेहतो ने बताया कि वह अपने अन्य परिजनों के साथ जयपुर में एक मार्बल फैक्ट्री में काम करता था। जहां ढाई माह से वेतन न मिलने के चलते मजबूरी में घर जाने के लिए निकला। जहां किसी तरह से वाहन से वह भरतपुर पहुंचा। जहां भरतपुर पुलिस ने उसे पहले से ही मौजूद भीड़ भरे ट्राला में बैठा दिया था। रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। बताया कि हादसे के वक्त वह सो रहा था। आंख खुली तो खुद को अस्पताल में पाया। घर में इंतजार कर रहे दो छोटे बच्चों को याद करते हुए कहा कि मेरे बच्चों के प्यार ने ही शायद जीवन बचा लिया।